
कोट भ्रामरी वन्दना "लगन"
रचनाकार: मोहन चन्द्र जोशी
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घर घरौं में तेरी आरती
थानौं थानौं त्यारा दि जगन।
मन मनौं में मनन में तू
य मनम कैं एकी त्येरि लगन।।
को डाई फूलों की
बिन त्यरा फुलि सकैं।
घुमि सकैं धरती नैं
नैं हवा घुमि सकैं।।
तु शक्ति पराणौं की
भ्रामरी माँ तुकैं शत नमन।
पयान झालामाली
शंकर पार्वती।
सत्य नारायणा
शीतला माँ उत्ती।।
और माता दिव्येश्वरी
हे शक्ति तुकैं शत नमन।।
जब अरुणाक्ष कैं
मौनौं का वेश में।
मारहौं अवतरण
य भारत देश में।।
भ्रामरी तु गरूड़ै की
हे शक्ति तुकैं शत नमन।।

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मोहन जोशी, गरुड़, बागेश्वर। 28-01-2016
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