
-:दानै'क महिमा:-
लेखिका: अरुण प्रभा पंत
दान त्याग आदि शब्द हम नानछना बै शुणते ऐ रैयां। सबै जांणनी कि समय पर कैं लै करि गेयी दान, त्याग ख्याड़ नि जान। पर दान सुपात्र कं आंख बंद कर बेर लै कर सकनछा और कुपात्र कं दान भौतिक आंखन कं खोल बेर लै गलत है सकूं।
चलौ एक काथ लेखनूं----
एक बार एक राज आपण प्रजाजन सहित तीर्थ यात्रा में गोय। बाट में एक आदिम नांगौड़ पड़ी भौय और ठंडाक मारी वीक थड़ैड़ि काम रै, कांमणौय बिचार। राजाक प्रजा में एक आदिम जैक पास मात्र द्वि धोति भाय वील आपण एक धोति उकं दिदीऔर उ मनखी कं त्राण ऐ गोय।
अघिल चलबेर घाम भौत्तै तेज है गोय पर अगासाक बादल उनन कं छाया देते रैंयीं, जां जां उ जानेर भाय बादल वैं वैं। राजैल सोच म्यार पुण्यप्रतापैल बादल छाया करते जांणैयीं। कुछ समय बाद एक जाग सबनैल विश्राम करौ और फिर जब उ जांण लाग तो वांक एक महात्माल पुछ कि "हे राजन कैक पुण्यैल बादल छाया दिणयीं तो राजैल के उत्तर नि दि तो महात्माल कौ कि आपुं सब एक एक कर निकलौ तब पत्त चलौल कि कैक पुण्यैल उननकं शीतल छाया उपलब्ध हुंणै!
जब सब उठण लाग पर बादल वां बै अघिल बड़ै नै, तब पत्त चलौ कि जैल आपण द्वि धोतिन बै एक धोति एक जाड़ैल कामणी मेस कं देछी उ तौ पड़ियै छु। जब उकं लै उठा और उ लै दगाड़ जाण बैठौ तो बादल फिर पैल्लियाकै न्यांथ उनन कं छाया करण लाग। तब पत्तचल कि राजाक पुर समूह में उ धोति दान करणी मैस सबन है अधिक पुण्यशाली छी जैल आपण मात्र द्वि धोतिन बै एक धोति निकालबेर दान कर दीं। जबकि उ राजैल लै भौत दान-पुण्य कर राखछी परंतु राजाक दानाक सामुणि उ मेसौक धोतिक दान अधिक महत्त्वपूर्ण मानी गोय।
योयी दान कं हमार धर्म ग्रंथन में ठुल मानी जां जैक महिमा हमारे सबै ग्रंथन में छु। आज हम एक क्यावौ'क कोश लै कैकंयी दिनुतो आपण फोटो फेसबुक, अखबार में देखण चांनू या एक तरफ बै चोरि घप्ल कर दुसार तरफ दान करण पर लै आपण बन्नत में विश्वास करनूं।
विचार करण पर समझ आओ शायद।
मौलिक
अरुण प्रभा पंत
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