
-: कुमाऊनी कं अपनाओ:-
लेखिका: अरुण प्रभा पंत
चाधैं मकं, अणकस्सै चितूणयूं। जर, गौल् खराब, खरखर करणौ। उठी नि सकणयूं, आंखन में चिणमिणांट, जिबौड़ बाकव जौ और तीस है गेछू औरि बात, रात भर आंख ताणियै रैयीं, झिट्ट घड़ि रातब्याण हुं मुणी आंख लागी।
लै म्योर हाथ पकड़ और ना ध्वे मैं तुहूं चहा पाणि ल्यूनू, बिना नैइए तू के खाली पेलि नै। पाणि गरम कर दिनु जाग मुणी देर। त्यार नाण तक मैं पुजैक साज कर द्युं। नै बेर, चहा पिबेर, तब पुज में बैठिए।
आज इजा मैं बणै दिनु खाण।
हिट आब नै ल्हे। आब कस चितूणै छै?
ऐल ठीकै छु।
के पकूं? पालंगौ'क तिनड़ी, मुलौक थेच्चु दगै रोट पकै द्युं या दलि ,खिचैड़ि,जे कुंछै।
जे तेरि मर्जी चेला।
मर्जी तो बिमारैक हुनेर भै।
कठिन शब्द:-
१. पालंगौक तिनड़ी- पालक की बिना काटे लोहे की कढ़ाई में बना साग
२. मुलौक थेचु- मूली सिलबट्टे में फोड़ कर कढ़ाई में बनायी गयी दही पड़ी तरी वाली सब्जी
३. कस चितूणौंछै- कैसा लग रहा है
४. नै ल्हे- नहा लो
५. पुजैकसाज- पुजा की तैयारी
६. मुणी- थोड़ा
७. पाणि- पानी
८. आंख लागिं- नींद आना
९. पिबेर - पीकर
१०. पुजैक- पूजा की
११. बिना नैइए- बिना नहाये
१२. खाली पेली- खायेगी पियेगी
१३. रात ब्याण--सुबह होने पर
१४.झिट्ट घड़ि--कुछ देर
१५.आंख ताणिंये रैयीं- आंखें खुली रहीअर्थात नींद नहीं आई
१६.जिबौड़- जीभ
१७.बाकौव- मोटी, जमी हुई गंदे स्वाद वाली
१८.आंखन में चिणमिणांट- आंखों के आगे अंधेरा या आंखों के आगे अंधेरा होना
१९ सकणयूं- पारही हूं
२०.गौल्- गला
२१. तीस- प्यास
२२. अणकस्सै- अजीब सा
२३. चाधैं मकं- मुझे देखो
२४. जर- ज्वर, बुखार
मौलिक
अरुण प्रभा पंत
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