इतु पढ़ा लेखा तुकं

कुमाऊँनी लेख-इतु पढ़ि लेखि बेर भारिभरकम ठुल नौकरी छाड़ बेर गौंपन वापस उंणौ। Kumaoni article about rural development of hills by individual efforts

--:इतु पढ़ा लेखा तुकं:--
(तुमको इतना पढ़ाया लिखाया)
लेखिका: अरुण प्रभा पंत

तैक बुद्धि कं के भांग फुलौ जो तौ इतु पढ़ि लेखि बेर भारिभरकम ठुल नौकरी छाड़ बेर यां वापस उंणौ।  सबन मैं हमरि इतु इज्जत और हमखम (दबदबा) छु, आब के कौल सब हंसाल हमन पर सब्बै।  बेलि हमार चेलि सौरज्यूक लै फोन ऐ रौछी कुणौ छी "तुमौर च्योलाक दिमाग में के आ जो वापस गौंपन बसणैक मंशा भै वीक, समझ नि आय।"

सब हमार च्याल भूपेश कं बेवकूफ समझणयी।  सयाण च्योल छु के ज्यादे कै लै निसकना वीक दगाड़ वीक दुल्हैण लै उणै बल,उकं लै के अकल न्हाती जो आपण दुल्हौ कं समझूनि धैं उल्ट बड़ खुश हैं बेर बतूणैछी-"इजाजी हम वापस गांव आ रहे हैं अब हमेशा के लिए, सबसे पहले मुझे आप अपनी बोली अच्छे से सिखाना और फिर मैं कुमाऊनी खाना और सारे रीति-रिवाज भी और अच्छे से सीखुंगी"।

मैल मनैमन कौ 'बज्जर पड़ौ' ,के भौंन्हल तनन कं सब भ्यार जानी, डबल कमूनी तौ असल लछमि छाड़िबेर यां भैरग्यूं (गांव में) में बसण चाणीं (बसना चाहते हैं)।  हमर बाद सब तनरै भौय यो कुड़ (घर) यो द्वार, यो जमीन जैजाद (जीमन जायदाद)।  भोलहुं पुज जानेर छन, आब्बै जब यांक घोलमथोल (गड़बड़) देखाल, परेशान ह्वाल तब फिर भाजाल या बै (यहां से भाग जायेंगे)।

यां टिकण (टिकने को) हुं 'काठौक खुट लुऔक कपाल' चैं (काठ का पैर और लोहे का माथा चाहिए)।  ऐल तनर ऊंण हमन कं भलै लागौल पछापछा (बाद बाद में) जब तनन कं दुखी देखुल तो हम लै तकलीफ में है जूंल।  तब तक भ्यार डांकखाण बै भूपेशाक बाबू लै ऐ पुजीं और कूण लागी कि भूपेशौक फोन ऐरौछी उलै और दुल्हैण (भूपेश की पत्नी) लै बड़ प्रसन्न लागौणौछी तुकं याद करणौछी, मैल कौ मैं ऐल घर न्हांतु"।

भूपेश कं विदेश बै गौं ऐयी हुई पुर छः म्हैण है ग्यान, वील आपण मेहनतैल यांक कुछ लौंग मौडनौक मन लै बदल है और उंलै आब यो गौं में रै बेर आपण काम शुरू करणौक सोचण लागरैंयीं।  सबने है पैल्ली तो हमौर गौ आब साफ सुथौर है गो सबनौक पोर्स गोबर गंदगी एक्कै जाग इकठ्ठ करणैक मुहिम चली और वील पुर गौंक बार (१२) परिवारों में एक बल्ब और खाण पकूंण हुं गोबर गैस प्लांट लाग गो।

गौक भितेर ले पात्र और ढ़चगैकि सड़क बढ़ गेयी।  सब घरनमें मौन पालन (मधुमक्खी पालन), मशरूम पालन और पुर गौंक बेकार इथ्कै उथ्कै (यहां वहां) घुमणी लौंडन कं बानर हकूणी टीम बणै बेर रोजगार मिल गो, प्रति लौंड २००रुपै हर म्हैण।

हमरि पढ़िलेखी ब्वारिल गौंक दस बार चेलि बेटिन कं पुर आपण आपण भाग्य कं शिक्षित करण हुं तंग्यार करबेर लगै हालौ।सबन कं हर दिन केवल द्वि घंटे यो काम यूं लगूण छन और उनन कं यैकबदाल में हर म्हैण ५०० रुंपे मिलणौ और यो सब डबल हर परिवार थैं हर म्हैण १०० रुपैं ल्हिबेर और शेष डबल ऐल भूपेश आफि खर्च करणौ और वील यैक लिजि एक 'स्वयं सेवी संस्था' (N.G.O.)बणूणाक लिजि अर्जी दि राखी अगर उ पास (स्वीकृत) है गेयी तो और लै भौत भाल काम गौंक उद्धाराक है सकनी।

पोरूं भूपेशाक बाबू कुणौछी "तौ हमौर भूपेश तौ सबनौक बड़बाज्यू निकलौ हो।"

मौलिक
अरुण प्रभा पंत 


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