
पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में मिली आठ तल वाली गुफा के भीतर उभरी आकृतियां
❤️हाट कालिका के पास मिली आठ तल वाली गुफा❤️
होगा शोध: पाताल भुवनेश्वर से बड़ा बताया जा रहा आकार, शिवलिंग के उपर टपक रही हैं पानी की बूंदें
गंगोलीहाट (पिथौरागढ़) : शैल पर्वत क्षेत्र की गुफाओं वाली घाटी गंगोलीहाट में प्रसिद्ध सिद्धपीठ हाटकालिका मंदिर से लगभग एक -किमी दूर आठ तल वाली विशाल -गुफा मिली है। गुफा के भीतर चट्टानों में विभिन्न पौराणिक चित्र उभरे हैं। शिवलिंग पर चट्टान की तरफ से पानी भी गिर रहा है। इस गुफा को चार स्थानीय युवाओं ने खोजा है और महाकालेश्वर नाम दिया है। माना जा रहा है कि यह प्रसिद्ध पाताल भुवनेश्वर गुफा से भी बड़ी हो सकती है। रविवार को गंगोलीहाट के गंगावली वंडर्स ग्रुप के सुरेंद्र सिंह बिष्ट, ऋषभ रावल, भूपेश पंत और पप्पू रावल ने गुफा में प्रवेश किया। गुफा के आकार को देखते हुए दंग रह गए। चारों गुफा में दो सौ मीटर भीतर तक पहुंचे। सुरेंद्र के मुताबिक प्रवेश करते ही पहले करीब 35 फीट गहराई में उतरे। फिर प्राकृतिक रूप से बनी करीब आठ फीट की सीढ़ियां मिली। आगे बढ़्ने पर इसी तरह आठ तल तक सीढ़ी और समतल भाग से होकर आगे बढ़े। इसमें नौवां तल भी था, लेकिन वहां पहुंच नहीं सके। गुफा करीब 200 मीटर लंबी है। सुरेन्द्र की सूचना पर कुमाऊँ विवि. के पूर्व भूगर्भवेत्ता डा. वीएस कोटलिया ने भी गुफा का निरीक्षण करने के लिए आने की बात कही है। अन्य गुफाओं की तरह यहां भी चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। शिवलिंग की आकृति पर करने के चट्टान से पानी टपक रहा है। इसके अलावा शेषनाग व अन्य पौराणिक हां भी देवी, देवताओं के चित्र भी उभरे हैं।
खोज-
• चार स्थानीय युवाओं ने की गुफा की खोज, नाम दिया महाकालेश्वर
• युवा गुफा में दो सौ मीटर भीतर तक पहुंचे, आठ फीट की सीढ़ियां भी मिली
अब तक अस्तित्व में आई गुफाएं-
पाताल भुवनेश्वर, कोटेश्वर, भोलेश्वर, महेश्वर, लाटेश्वर, मुक्तेश्वर, सप्तेश्वर, डाणेश्वर, सप्तेश्वर, भुगतुंग (माना जाता है कि भृगु संहिता यहां पर लिखी गई थी)।
"पिथौरागढ़ में हाटकालिका मंदिर के समीप पाताल भुवनेश्वर गुफा की तरह ही नई गुफा खोजे जाने की सूचना मिली है। विभागीय टीम मौके पर जाएगी और इस पर शोध शुरू किया जाएगा।"
-डा.चंद्र सिंह चौहान, प्रभारी क्षेत्रीय पुरातत्व इकाई, अल्मोड़ा

पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में मिली गुफा के अंदर पहुंचे युवा
चट्टानों पर उभरी हैं पौराणिक आकृतियां-
शिवलिंग की आकृति वाली चट्टान से लगातार टपक रहा है पानी, देखने को उमड़ रहे हैं लोग:
स्थानीय चार युवाओं द्वारा खोजी गई गुफा अब जिज्ञासा और आकर्षण का केंद्र बन गई है। क्षेत्र की अन्य गुफाओं की तरह यहां भी चट्टानों पर पौराणिक आकृतियां उभरी हैं। शिवलिंग की आकृति पर चट्टान से पानी टपक रहा है। इसके अलावा शेषनाग व अन्य पौराणिक देवी, देवताओं के चित्र भी उभरे हैं।
टीम लीडर सुरेंद्र सिंह ने बताया कि उनके पास प्रकाश के लिए कम रोशनी वाले टार्च थे और रस्सी आदि नहीं होने से वे नौंवे तल तक नहीं पहुंच सके। यह अब तक मिली गुफाओं में सबसे बड़ी है। गुफा के अंदर पर्याप्त आक्सीजन है। 1 50 मीटर गहरी पाताल भुवनेश्वर की तरह यह गुफा इस क्षेत्र के पर्यटन में मील का पत्थर साबित हो सकती है। गंगावली वंडर्स ग्रुप को आधुनिक ने उपकरण मिले तो वे क्षेत्र की तीन अन्य गुफाओं की जानकारी भी सामने लाएंगे।

गुफा के अंदर इस तरह उभरी हैं आकृतियां
अब तक 10 से अधिक गुफाएं मिल चुकी हैं-
गंगावली क्षेत्र के शैल पर्वत शिखर परमानस खंड में 21 गुफाओं का जिक्र है। जिसमें दस गुफाओं का पता चल चुका है। सिद्धपीठ हाट कालिका मंदिर के आसपास रविवार को मिली गुफा के अलावा तीन अन्य गुफाएं होने के संकेत भी मिल चुके हैं।
एक साल पहले हुआ था प्रयास-
गुफा की मौजूदगी के बारे में करीब एक साल पूर्व गंगोलीहाट के युवा दीपक रावल को जानकारी मिली थी। वह इस गुफा के संकरे प्रवेश द्वार से अंदर गए, परंतु संसाधन नहीं होने से प्रयास सफल नहीं हो सका।
संवाद सूत्र, दैनिक जागरण सवाददाता, हल्द्वानी, अप्रैल 4, 2022 से साभार
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