नारी क् दुख - कुमाऊँनी दोहे
रचनाकार: मोहन चन्द्र जोशी
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
अन्तर्राष्ट्रीय महिला दिवस कि हार्दिक बधाई और शुभकामना।
रोजै ब्वाज तवाइ रोज, नारी हैं द्दु असोज। कसिक वीक दुख कम हल, कै कैंणीं नैं सोच।। जैका तव नैं भिपैरी, थम नैं कभैं खुदबुद। हाइ - तवाइ कम करणै कि, कदिन हला सुधबुध।। कम हौं कसिक नारिक् दुख, स्वैणा द्यखण छु सुख। कामैं-काम छु भाग परि, हराँणाँ र्वाट लै रुख।। डाँनकि कासिलि किर्साण हुँ, कासिक हँ कम तौयाट। समाज देखी रौयाट हौं, मन भितेर बौयाट।। चाँनि परि बाव नि जाँमण द्यन, भाग जैक ढनचाव। पहाड़ जसा दुख डाँन् परि, कम नैं गावागाव।। ठुल्ल गढौव, गैस सिलण्डर, ठुल्ला ख्वाराक् ब्बाज। कम हो जसिक य तवाई, कैलै लै नि स्वाच।।

0 टिप्पणियाँ