❤️भारतीय नववर्ष के आगमन का प्रतीक है फूलदेई❤️
लेखक: गणेश पांडेय
सोमवार से हो रहा है ऋतुराज वसंत का आगमन
हिंदू परंपरा के अनुसार नये साल का आगमन चैत माह की संक्रांति से माना गया है। नये साल के शुभागमन पर मान्यता के अनुसार बच्चे एक दूसरे के घरों में फूलों की थाली लेकर शुभकामनाएं देने जाते हैं। इसलिए इस संक्रांति को फूल संक्रांति के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू परंपरा के अनुसार नये साल का शुभारंभ नव संवत्सर से होता है। इस वर्ष २०२२ में नया संवत दो अप्रैल से प्रारंभ होगा। इस दिन से नए साल का पंचांग लागू हो जाएगा। लेकिन नये साल का आगाज मेष संक्रांति अथवा फूिल संक्रांति से ही मनाने की आदि परंपरा रही है। इस दिन बच्चे बुरांश, प्योली, सरसों, आदि के फूलों से सजी थाली लेकर प्रत्येक घरों में जाते हैं। बच्चे फूल देई छम्मा देई, दैणी-द्वार भर भकार गीत गाते हुए लोगों से मिष्ठान और दक्षिणा भी प्राप्त करते हैं। प्रकृति भी नए साल का स्वागत रंग बिरंगे फूलों के साथ करती हुई दिखाई देती है। जंगलों में बुरांश सहित विभिन्न प्रकार के फूल निराले अंदाज में शीत ऋतु के अवसान के पश्चात बसंत ऋतु का स्वागत करते हैं। इस ऋतु में प्रकृति की भव्यता और अनेक मनोहारी दृश्यों के दर्शन होते हैं।
इस प्रकार फूलदेई त्यौहार का सीधा संबंध प्रकृति से जुड़ा हुआ है। यह त्यौहार गांव-गांव में छोटे-छोटे बच्चों द्वारा बड़े ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है। फूल संक्रांति के दिन बसंत ऋतु के आगमन की खुशी में घरों में तरह-तरह के पकवान बनाये जाते हैं। परिवार के बुजुर्ग लोग बच्चों को शुभ आशीर्वाद देते हैं।
गणेश पांडेय, दन्यां, 14-03-2022
दैनिक उत्तर उजाला, फरवरी १४, २०२२ से साभार
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