म्यर जन्म भूमि

कुमाऊँनी कविता, जननी हमर लै छा य नौ लाख कत्यूरों की भूमि। Poem in Kumaoni language, my birthland

म्यर जन्म भूमि

रचनाकार: सुबोध उपाध्याय

जति छा वीर भड़ों की गाथा, 
सुकिलो चमकनी हिमालय, 
जति छा दय्पतों क्वास, 
म्यराय पहाड सुन्दर, 
प्राणों बै प्यार छ हमकै, 
मेरों पहाडै कि न्योरी छटा, 
छलकि छा धार झरनों मा, 
प्रकृति की अनुपम छटा।
 
मै गीत पहाड़ को लिखनू
 पहाड़क रीति रिवाज को 
ममुख अभिमानल उठी जां 
सुणि संस्कृति इतिहास कौ, 
पुराणियों क किस्सू सुनणु,
कभै दगड मा बैठि, 
जननी हमर लै छा य
नौ लाख कत्यूरों की भूमि।।

चौधार मा बैठि सुणछि 
आमा की कुड़ी  कहाणि 
चाखुला उड़ैनि आकासा
यां का शीर्ष शिखर देखनि 
त्येरी प्यारी माटी में जन्मी
हरूहीत जसा रजा 
य सौभाग्य छा हमार लै,
बनि बेर उनरि प्रजा। 

सुबोध उपाध्याय, 24 MARCH 2018
खुमाड़ सल्ट अल्मोड़ा
उत्तराखण्ड
 
सुबोध उपाध्याय जी के फेसबुक पोस्ट से साभार 
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