हमार फल-फूल और बुनियाद

कुमाऊँनी भाषा में कविता - हमार फल फूल और बुनियाद, Poem in Kumaoni language about flora and culture of Kumaon, Kumaoni Culture

-:हमार फल-फूल और बुनियाद:-

लेखिका: अरुण प्रभा पंत

किल्मोड़ैक भरमार हिसालुक झाड़
काफलौक बोट, भिं काफलैक खोज
जाछिंया पात पतेल खोजण बिनण
श्यूंताक ठिठ, जांठ, घुस्याल, जाड़मुड़
सबै चैनभै हमर आम् इज काखि कं
गोरुक गुप्टाव चानचांनै पहाड़ आंखर सिखनै रैयां
आय हम ल्यूनेर भयां प्योलि, गुलबांक 
गुलाब जेलै मिल किराव सदाबहार
सब हम लाग जानेर भया काम पर
भेकुआक पात हौ या लगिल हुं ठांग
सबनाक जानकार हम,ज्यौड़ बणूण
सुप डाल लै बणते हमुल द् याख हो
के लै काम हौ हम झट्ट तंग्यार भयां
पढ़ाय दगै सब्बै चलते रुनेर भाय हमार खेल
फिर लै हमुल पुरकरि आपण सबै काम
गीद,संगीत लै जाण ल्हे हमुल होलि
चांचरि, झोड़ शुण शुण, ढोलुक,तब्ल
हारमोनी मंजिर केलै नि सिखाया पै
सबहम सिखते रैंया पढ़ाय लैपुर करते रैंया
दवाय पुड़ी लै आम् थैं जांणी
मौसमौक मिजाज हो या नाखौक सोर
सब हमुल सिखौ आपण सयांणन थैं
जबगयां और पुजां हम भ्यारेक दुनि में
पैल्ली हम गजबजि जै गेया फिर भबरी
आब पुरै बदयी गेया।

क्याप क्याप खाण स्वादौक बदलाव
जेलै हौ जस लै हौ जो हमर बुनियाद
उ खत्म नि हैयी चै सब सब सिखौ
खाओ पिऔ पर आपण खाण कं 
ह्याल नि करौ उकं लै प्रचारित करौ
हम उत्तराखंडी छां कूण में 
नि शरमाऔ, नि हिचकिचाऔ नि भुलौ।

मौलिक
अरुण प्रभा पंत 

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