जिम कार्बेट पार्काक् शेर......

कुमाऊँनी भाषा में शेर-शायरी, ज्ञान पंत जी द्वारा  Sher-Shayari in Kumaoni language by Gyan Pant, Kumaoni Shayari

जिम कार्बेट पार्काक् शेर......

रचनाकार:  ज्ञान पंत

तु ऐ गोछै
भल करौ ....
पहाड़ में यसो भै
उज्या्व हुन - हुनै
ब्वारी बँण न्है जानीं
आ्म पोर्स गाणैं
गो्र बाछन भ्यार बादैं ...
तब जाँणैं
रौन छै चहा उमैयि जां
पोथा !
बाबू छा्ज में बैठि
चहा सुड़कै ल्हिनीं ....
रेब्दा .....
ऐ ग्या त गप - सड़ाका ले है जै
ब्वारि .....
एक गढौ्व गाज्यो ल्ही बेरि
मोव थै कि पुजैं ....
भौ अलाँण भै जाँ
उकैं ले थामण भये
जब जाँणै डालुन भौ छी
कत्ती ले लै लोटी रय -
आब् खुट जामि गियीं ....
इज कैं पच्छयाड़ण भै गो
..... मे बीति के नि हुन !
पट्ट घुन टुटि गियीं
पत्त न के बजर पड़ौ
आपणैं शरीर बो्ज है ग्यो ....
भौ थामीणो त
रिस्यान ले जाँण भये ....
बाबू आजि ले " वार " नि खा्न
आ्ग हाल्यालि
इन टटमन कैं .....
मैलि कतुकुप बखत कै है
त्यार बाबु ट्याड़ छन ट्याड़
कत्तई ल्या्ख नि लगूँन ...
खाँण पिंणा बाद
भनबान ले भयी पैं
को करौल ?
सब ब्वारी ख्वारुन भै ....
झिट घड़ि ले आराम नि भै
दोफरि मात
जतुकै देर भौ छाति ले ला्ग
उ ले बैठें और
भौ सितौ त
ब्वारि खेतन हुँ न्है जैं ...
मैं पौर्रु भयूँ आ्गहान
सोचूँ ! मणी तात जै हुँनीं त
मैयी हरी घा चै ल्यूँनीं ....
अन्यार हुँण है पली
ब्वारि मोव थैं पुजि जै
गोर बाछनां ख्वारुन
घा तिनाड़ खितैं त
सबासब बँगतरी जानीं
दिनमान उकैयीं चै रुँनी .....
भ्यावहा्न यो ले
वीका गति लागी भै ....
शिबो ! ब्वारि ले कतु करैलि
मसीन जि भै .....
उ लै हाड़ माँसै की बणीं भै
हमैरि न्याँत ....
ज्वान छिनानै चिमड़ी गे ...
फिर ले
आदु है ज्यादे खेति
बंजर पड़ि रै
क्वे करणै नि चान ....
सबासब मलि देबीनगर बसि गियीं
गौं बा्ँज पड़ि रौ ....
आब्बै चौमास में आफत आलि
क्वे भये न याँ पन
पोथा ! तु एक काम कर
ब्वारि कैं दगाड़ै ल्हिज
चिन्ता न कर
हमा्र दिन काटी जा्ल ....
त्योर एक खुट लखनौ
एक घर ... ...
मैं भौत्तै अखरों पोथा ....
बाबू ले आ्ब
बखतैकि चाल समझण भैगियीं
कूँनीं ....
बखत - बखत'कि बात छ
ऐल
योयी ठीक रौँल बल .......
पहाड़ मे।

May 31, 2017
...... ज्ञान पंत
ज्ञान पंत जी द्वारा फ़ेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी से साभार

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