हुंण चैंनी

कुमाऊँनी कविता - हुंण चैंनी- Kumauni Kavita about we should be generous not selfish

हुंण चैंनी

रचनाकार: नवीन जोशी नवेंदु

आंपण आ्ंखन बै आपंणै आ्ंस
आपंणि खा्पड़ि बै आपणी हंसि
आपंण गिजन बै आपंणै गीत
आपंण कपाव में आपंणै चिन्त
आपंण का्न में आपंणै ब्वझ
आपंण खुटौं बै आपंणै बा्ट
आपंण हातन बै आपंणै काम
भल निं भै।

हुंण चैंनी-
आपंण आंखन बै दुसरौंक आ्ंस
आपंणि खा्पड़ि बै दुसरौंकि हंसि
आपंण गिजन बै दुसरौंक गीत
आपंण कपाव में दुसरौंकि चिन्त
आपंण का्न में दुसरौंक ब्वझ
आपंण खुटौं बै दुसरौंक बा्ट
आपंण हातन बै दुसरौंक काम

आपंण पर्या नि सोचि बेर।

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राष्ट्रीय सहारा कार्यालय, पॉपुलर कंपाउंड, मल्लीताल, नैनीताल। 
पिनः 263002।   उत्तराखंड।

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