
-:एक ऐतिहासिक तथ्य जैल हम परिचित छां!:-
लेखिका: अरुण प्रभा पंत
इतिहास में तीन पानीपताक युद्ध भयीं:---
१. १५२६ ई.में जहीरुद्दीन मोहम्मद बाबर और इब्राहिम लोदीक बीच मेंजमैं बाबर जितौ।२. १५५६ ई. हेमचंद्र विक्रमादित्य और तथाकथित अकबर महान। जमैं अकबर जितौ और वीक बाद वील जो मारकाट मचै उ क्वे दुर्दांत व्यक्ति ही कर सकूं।पर ऐस लै कुनी कि उभत यो सब करतूत वीक पालक और सेनापति बैरम खांक छी बल।३. १७६१ ई.में अहमद शाह अब्दाली और मराठा सेनापति सदाशिवराव भाऊ बीच भौं, जमैं अब्दाली जितौ। यैकै बार में मैं बात करण चानू।
मराठान में भौत अलग अलग मराठा सरदार और एक भील नेता इब्राहिम गार्दी लै छी। इनौर नेतृत्व मराठा सरदार सदाशिव भाऊ करणौ छी। पर अब्दालीक दगै अफगान रोहिल्ला और अवधौक नवाब शुजाउद्दौलालै छी यो युद्ध मराठा जितते जितते हार गयीं और हारते हारते अब्दाली विजयी भौं, य परै मैं आज लेखण चां।
यो युद्ध जब काफि लंबे खिंच गो और अब्दालीक सेना में वापस जाणौक स्वर उठण लागौ और अब्दाली लै परेशान हैं बेर अघिल दिन वापस जाणि छी और उदास मनैल आपण सेनापति दगै आपण एक उच्च स्थान में चढ़बेर चारों ओर देखण लागौ और वील जब मराठा छावनी तरफ चा तो वील कई जाग बै धुंग उठते देखौ तो वील आपण सेनापति थैं पुछौ "इतना धुआं अलग अलग जगह से क्यों आ रहा है ?य ह सब क्या है?"
सेनापतील जवाब दे "हुजूर यह सब मराठा सरदारों की अलग अलग रसोइयों से आरहा है, क्यों की हर सरदार अपनी रसोई का खाता है इनमें कोई भी एक दूसरे का छुआ नहीं खाता, इसलिए अलग अलग-अलग रसोई पक रही है इनका यही चलन है"।
"अच्छा ऐसा ,जो साथ खा नहीं सकते वह हमको क्या हराएंगे"
अब्दालील आपण वापस लौटणौक कार्यक्रम रद्द करौ और उ रातै हुं मराठा छावनी में आक्रमण कर दे और शानदार विजय प्राप्त करी।
हम सदैव आपण संकीर्ण मानसिकता कारण एकजुट नि है सकां और जितते हुए लै आंखीर में परास्त होते रैयां, पत्त नै हमन कं कब अकल आलि।
मौलिक
अरुण प्रभा पंत
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