जय माता दी

कुमाऊँनी देवी वंदना - जै माता दी - Kumauni Devi Vandana - Ja Mata di - Kumauni devotional Poetry

जय माता दी

रचनाकार: सुरेंद्र रावत

मेरी माता जो छु पै, य दुनीं में सबों कैं, 
बिना मनक आंखों लै देखण में नि आनी।

भक्त जो लै माता जी कैं, मिलण चाहनी, 
मात जी'क खुटुं मजी, मुनयी झुकानी।

पहाड़ों की माता, हमरि छु विधाता,
करी बै सवारी जब उ, शेर में एंछ। 
तो पापियोंक नाश में, कां देर लगै छ।

गाड़ गध्यारों पाणी, हरी भरी स्यार, 
जब चली ठन्डी ठन्डी,पवन सुहानी। 
यों सारे ईजा तेरी महिमा सुणानी।

मेरी माता जो छु पै,य दुनीं में सबों कैं, 
बिना मनक आंखों लै देखण में नि आनी।

जय माता दी। 
दुर्गाष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं।

सुरेंद्र रावत, "सुरदा पहाड़ी",  03-10-2019

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