
शकुनाखर (धुल्यर्घ'क् गीत)
तारा पाठक (आमा कोचिंग सैंटर)
चलौ तुमी रामी चँद्र, लछीमण, शाल दोशाला ओढी़,
धोती उपर्णा पैरी, जरकस पाग पैरी,
सेती जनेऊ पैरी, पिंहली धोती पैरी,
चंदन लिलाट पैरी, तिल कुश हाथ धरी।
सबही समाज चली आए।
चलौ तुमी (घरा बैगों नाम,च्यालों नाम) जरकस पाग पैरी,
शीश मकुट पैरी, पेची व सेहरा पैरी, कानन कुंडल पैरी,
नैनन काजल डारी, केशर तिलक लगाई,
सुंदर रूपी देखो मैंलै देवकी को पुत्र नारायण ठाडो़।
मूंगमोती बाजूबंद पैरी, हीरा अँगूठी पैरी,
अंग में बागा पैरी, कमर पटका पैरी,
कंध दोशाला पैरी, लाल खडा़ऊं पैरी,
ऐसो रूपी देखो मैंले देवकी को पुत्र नारायण।
(जब चेली यां बर्यात ऐं त यो गीत उभत गाई जां ,जै भाव छ-चेली पक्षा सब बैग,च्याल तुम बर्यातै अगवानि हुं हिटौ,सुंदर पिलि धोति पैरी ,शाल दुशाला पैरि ,जरी पाग पैरि ,सफेद जन्यो पैरि,खुटन खडा़ऊं पैरि बेर हिटौ ।मैंल आंङण में सुंदर पैराव वाल मैंस ठाड़ देखौ जाणी देवकी च्याल भगवान श्री कृष्ण छन,तुम उनरि अगवानी हुं हिटौ।)
फोटो सोर्स गूगल

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