
आपनी सरसार हैरे
रचनाकार: राजू पाण्डेय
आपनी सरसार हैरे
चुमास ना बरखा ना
फिरि ले कचारे कचार हैरो
छानी बानी नेता है ग्यान
कामै जागा बिचारे बिचार हैरो
खराब स्कूलो हाल छन
गरीब मरीज बेहाल छन
बिजली जसे पुना छन
रोड ले छ कुना खन
बिन शीशा सीटों बस छन
कौ देखो हाल कस छन
काई बाटा-घाटा बुजी रयान
काई पानी हाहाकार हैरे
छोड़ी छोड़ी भाजनयान मैस
छन आँखा कानि सरकार हैरे।
कवै कुच्छ भकार मेरो
कवै कुच्छ औढ़ार मेरो
कवै कुच्छ डूंगा मेरो
कवै कुच्छ दूँगा मेरो
कवै कुच्छ झाड़ मेरो
कवै कुच्छ भाड मेरो
जौ भुको मरनो मरन दी
बस आपनी सरसार हैरे
पहाड़ भली कै निचोड़ी
"राजू" लूटी खान्या सरकार हैरे।

शब्दार्थ:
छानी बानी - तरह तरह के।
पुना – मेहमान।
कुना खन – कहने के लिए।
भाजनयान - भाग रहे है।
कानि - अंधी।
कवै कुच्छ – कोई कहता है।
भकार – अनाज रखने के लिए लकड़ी का बॉक्स।
औढ़ार – छोटी गुफा।
डूंगा – पहाड़ में जमीन का बड़ा हिस्सा।
ढूँगा - पत्थर।
~राजू पाण्डेय, 22-01-2020

=============================
बगोटी (चंपावत - उत्तराखंड)
यमुनाविहार (दिल्ली)
bagoti.raju@gmail.com
Copyright © 2019. All Rights Reserved
0 टिप्पणियाँ