लाकडाउन में ईजा क दगाड ग्यूं क पहर

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लाकडाउन में ईजा'क दगाड, ग्यूं'क पहर 

लेखक: विनोद पन्त 'खन्तोली'

आज लाकडाउन में छत में ईजा क दगाड ग्यूं क पहर करणा लिजी बैठ्यू किलै कि बानरनक आतंक यां ले बहुत छ।  घर क पिछाडि बटी बाग(बगीच) छ, वां आजकल आम लीची कटहल वगैरह कदुकै फल लागि रईन।  वां ले बानर भजूणा लिजी हाकाहाक दिन रात चली रूं, दरअसल बाग कें मालिक लोगनैलि पैलिये ठ्याक में दि हालौ।  पास क गौं बटी कुछ ग्रामीण बाग क फल अल्लै बटी खरीद ल्हिनी..।  आब जब तक फल तैयार ह्वाल उ लोग दिन रात बानरन बटी रखवाली करनन।  उनैलि बोटन में कन्टर बादि राखन, मुखैलि ले हुट्ट ह्वाट्ट करते रूनन।  कबै गुलेल मारनन कबै ढुग्यूनन, मी छप बटी यो सब देखू तो मेकें कुछ हद तक गौं क जस माहौल लागण बैठ जां। 

हालाकि कुछ लोगन कें उनरि हाकाहाक भलि नि लागन..।  डिस्टर्ब हूं बल, हालाकि गाडिनक हौरन, सायरन कि आवाज, आदु रात में स्कूटर उनन डिसिटर्ब नि करन पर कुछ गरीबनक आपुण रोजी रोटी बचूणा लिजी लगाई जाणी आवाज शोर लागैं..।  खैर, आज ग्यूं सुखाते हुए बचपन और किशोरावस्था कि याद ले ताजा है ग्याय।  जब बिसकूण घाम डालनेर भै ईज तो पहर करनकि ड्यूटि हम नानतिनकि लागनेर भै।  तब बानर नि भाय पर  डोई कुकुर, कैकै गोरु बाछा, चाड प्वाथ नुकसान करि दिनेर भाय।  और बीच में बर्ख पाणि ले डर भै, हम नानतिनन कें यो काम बोरिग लागनेर भै।  मनै मन कूनेर भयां हे भगवान द्यो लाग जान और हम यो बिसकूण समेटबेर  कैके गोठन खेलण हूं न्है जाना..।  कबै खालि बादल में ले समेट दिनेर भया और भाजां खेलण..।
 
बिसकूण सुखूणा लिजी तब मोस्ट हुंछी.. मोस्ट में कुछ अनाज छिरि ले जानेर भय।  तब ईज लोग हम सब चानेर भयां, टिपनेर भयां एक-एक गुद।  ईजैलि हमन कें एक एक अनाजक गुद क महत्व समझाई भै।  आम हमैरि बाटपन कैके मांस क बोट भट क बोट लिजाण में क्वे बोट छुटि गे तो उकें टिपिबेर लि आलि और गुद निकालिबेर हमन देखूनेर भै और कूनेर भै देखो मीलि एक बखतकि दाल एकबट्यै है, चीजक बरबाद नै हुण चैन।

असल में उनैलि मेहनत करिबेर उगाई भै तो महत्व ले ज्यादे भै।  बरख, आँधी तूफान, डाव, मुस, सौल बटी बड मुश्किलैलि बचाय तब खेति हुनेर भै।  कबै के डाव हाव पडि गे सब मेहनत गाड बगि।  अनाजक महत्व समझूणा लिजी ईज एक किस्स ले कूंछी..-
कथप एक राज जाण लागि भै, बाट में एक ग्यूं क गुद छुटि भै।  राज घोड बटी उतर और वीलि उ ग्यूं गुद टिप बल..।  उ दिन बटी वां अकाल नि पडन बल..।तब हमार कि समझ में उंछी यो काथ क संदेश..!  हम पुछनेर भयां  कां भोय उ देश..!  को भोय उ राज..!
आज जब कन्ट्रोला दुकान में ठाड हुनू.. या बजार बटी राशन खरीदनू.. तब यो काथ क सार समझ में उँ......।

विनोद पन्त' खन्तोली ' (हरिद्वार), 22-05-2021
M-9411371839
विनोद पंत 'खन्तोली' जी के  फ़ेसबुक वॉल से साभार
फोटो सोर्स: गूगल 

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