
शकुनाखर
(ब्योलिक कन्दान में बैठण बखतक् गीत)
तारा पाठक (आमा कोचिंग सैंटर)
चंदन चौकी बैठी लडै़ती,केश दिए छिटकाय ए।
लाडू़ के ददज्यू यूं उठि बोले,
लाडू़ के ताऊ यूं उठि बोले,
केश सम्हालो मेरी लाडि़ली,
बै ठे सभा भरी लोग ए,
बैठे हैं पंडित लोग ए।
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे दादा जी,
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे ताऊ जी,
ऐ पुजी लगन की बेर ए।
ऐ पुजी पुन्य की बेर ए।
लाडू़ के बबज्यू यूं उठि बोले,
लाडू़ के ककज्यू यूं उठि बोले
केश सम्हालो मेरी लाडि़ली,
बैठे सभा भरी लोग ए,
बैठे हैं पंडित लोग ए।
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे बाबाजी,
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे चाचा जी,
ऐ पुजी लगन की बेर ए।
ऐ पुजी पुन्य की बेर ए।
लाडू़ के भय्या यूं उठि बोले,
लाडू़ के बीरन यूं उठि बोले
केश सम्हालो मेरी लाडि़ली,
बैठे सभा भरी लोग ए,
बैठे हैं पंडित लोग ए।
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे भय्या जी,
अब कैसे केश सम्हालं मेरे बीरा जी,
ऐ पुजी लगन की बेर ए,
ऐ पुजी पुन्य की बेर ए।
लाडू़ के नाना यूं उठि बोले,
लाडू़ के मामा यूं उठि बोले,
केश सम्हालो मेरी लाडि़ली,
बैठे सभा भरी लोग ए,
बैठे हैं पंडित लोग ए।
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे नाना जी,
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे मामा जी,
ऐ पुजी लगन की बेर ए,
ऐ पुजी पुन्य की बेर ए।
लाडू़ के जीजा यूं उठि बोले,
लाडू़ के फूफा यूं उठि बोले,
लाडू़ के मौसा यूं उठि बोले,
केश सम्हालो मेरी लाडि़ली ,बैठे सभा भरी लोग ए,
बैठे हैं पंडित लोग ए।
अब कैसे केश सम्हालूं,मेरे जीजाजी,
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे फूफाजी,
अब कैसे केश सम्हालूं मेरे मौसा जी,
ऐ पुजी लगन की बेर ए,
ऐ पुजी पुन्य की बेर ए।
(पैंल जबान में कन्दाना बखत ब्योलि बाल खोली धरैंछि, तब घरा सयाण मैंस उधैं बाल बादण हुं कूंनी त ब्योलि कैं-आब नि बादि सकन्यूं ,पुन्य ,दान करणक् टैम ऐ गो।अच्यालों पार्लर बटी बादियै बालों में ऐ ब्योलि।)
फोटो सोर्स गूगल

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