भनुलि स्वै(दाई)

कुमाऊँनी किस्स - भनुलि स्वै (दाई), Kumaoni kissa about a lady who serves in rural villages as woman health worker

-:भनुलि स्वै (दाई):-

लेखिका: अरुण प्रभा पंत

पहाडै़कि काथै काथ।  उसी तो सबनलै भौत्तै कष्ट सहनौल आपण कं और आपण संतान कं यो धरती में ल्यूण और पावण शैतण में।   सबन है जियादे हमरि मातृशक्तिल आपण जान में खेलबेर हमन कं यां तक पुजा।   उ जमान में न आवागमनाक साधन भाय न अस्पताल और न प्रशिक्षित नर्स डाक्टर।ननानान चेलिनैल आपण प्राण कं उचैण जौ धरबेर  हमार पूर्वजन कं जनम दी तब आज हमौर अस्तित्व छु।

उ टैम में नानतिन पैद करणाक लिजि हर गौं में या द्विचार गौंनाक बीच में एक द्वि स्वै (दाई) या कुछ परिवाराक शैणी हुनेर भ्या जो नानतिनैकि पैदाइश में सहायता करनेर भ्या।   यो काम एक जोखिमभरी हुनेर भौय जमें कत्तु चैलिनैकि जान न्हैं जांछी बल।   भैरवथान गौं में एक बचुलि स्वै भै जैक हाथ सब कुनेर भाय औरै जसिल छु।  मरणी जै शैण जतकाय है बेर संदर कै बैठ बेर अघिल दिन आपण भौ कं दूद पेवाते दिखि जानेर भै।

बचुलिक लै काथै भै।यो गौं में वीक मैत भौय और पासाक गौं कलमांण में वीक ब्या भौ पर ब्याक छः म्हैणाक भितेर बचुलिक दुल्हौ निमौन्नि में मर गोय हो के करछा तब आपण सौत्ति (सौतेली)इजाक दगाड़ जै बेर वील स्वैक काम सिखली और फिर यकलै गौं गौं जै बेर स्वैक काम करण लागि और तबै  जैंती नामौक एक च्योल दगै वीक दुसौर ब्या है गोय।

उ जमान में कुछ जातिन में शैणि दुहौर तिहर तक ब्या कर ल्हिंछी।  आब बचुलि फिर से सोहागिल और आपण सौरास वालि है गेय और आसपासाक गौन में स्वैक काम लै करनेरै भै।  यो बीच में बचुलिक एक चेलि भै जैक नाम भानुमती धरी गोय जो बिगड़बेर भनुलि है गोय।   भनुलिक बाब जैंती पछा पछा सिर्फ जु खेलण और इथकै उथकै डोई रूण में रुनेर भौय तो एक दिन बचुलिल आपण निखट्टू दुल्हौ कं घर बै निकाय दे और आपण चेलि भनुलि कं यकलै पावौ और स्वैक काम सिखा और फिर द्वियै मै चेलि यो काम पुर चार पांच गौं में आफि करण लाग।
 
अघिल चलबेर भनुलि, बचुलि हैबेर लै सकर जसिल हाथैकि स्वै रूप में जाणि गे।   सब नानठुल घराक आपण चेलि ब्वारिन कं भनुलि कं सौपबेर निश्चिंत है जांछी भनुलि कं आपण काम इतु भल लागछी कि वील कभै ब्या नि कर और पुर टैम सबनैकि मदद करण मे रुनेर भै।  उसी उकं आपण काम में इतु जस मिलौ कि सब शैणी वीक भौत्तै खिदमत करनेर भ्या।

एक अंग्रेज डाक्टरैल उकं आपण अस्पताल में नैनताल हिटणाक लिजी लै कौ पर भनुलिल आपण उ चार पांच गौकं कभै नि छाड़ बस कुछ जरुरी सामानाक लिजि पास में एक दोकान खुलवै दे।  ऐस लै शुणन में आ कि भनुलिक हाथैल क्वे शैणि मरि न्हा़ँ, अंग्रेज लै वीक सफल कामैकि बन्नत करछी बल।

मौलिक
अरुण प्रभा पंत, 12-01-2021

अगर आप कुमाउँनी भाषा के प्रेमी हैं तो अरुण प्रभा पंत के यु-ट्यूब चैनल को सब्सक्राईब करें

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ