म्यार मोछ

कुमाऊँनी लेख - म्यार मोछ, Kumaoni language article about teenager pahadi, Kumaoni bhasha mein Lekh


-:म्यार मोछ:-

लेखिका: अरुण प्रभा पंत
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"इजा त्वील शुणौ" कहते हुए पवन पवन जौ उड़ते हुए जौ मुखतिर ठाड़ है गोय।  "के भौं''?   वीक इज चनि आंख और हाथाक इशारैल पुछ बैठी।  "उ पार जल्लै ठुल गोदाम छुनै वीकै बगल में मैंसनौक गिरदम्म है रौछी।"  "यो शहर भौय च्यला यां यौस लागिये भौय, हमौर ताड़िखेतौक गौं जेके छु"।  चनि ऐस कहते हुए आपण हाथ-खुट ध्वेबेर हल्क स्वर में भजन गैते हुए द्याप्ताठै हुं जानि रै।  "अरे पुर बात तो त्वील शुणी न्हें"! चनिल इशारैल बता कि "चुप रौ पुज करण दे"।

पवन जो बड़ अजीब अणकस्सै सोचते हुए आपण इज थै जे देखौ वीक विशद वर्णन करण चांणौछीचुप हैगो और आपण हाथखुट ध्वे बेर बैठौ और आरती हुण जांलै बैठ बेर आपण किताब पल्टूण लागौ।के करछी बाबू तो द्विदिनांक लिजि भ्यार जैरान,ठुल दाद हौस्टल में छु दिदिक ब्या हैगोआब घर में वी छु जो सबन है निकांस्सै और आपण हर जिज्ञासा और मनैक बात आपण इज बाबन थैं करण चां, पर वीक इज बाब उकं आय लै नानतिन समझ बेर टरकै दिनन।

उसी पवन एक कौय कराकौक  सिध साध चौद पंद्रह बरसौक लौंड छु जैक दुनि वीक इज बाब दाद और दिद छन,पढ़न लेखण में लै वीक मन लागनै छुपै पर इथकै वीक मन में भौत सवाल उठनी और जनौर उत्तर वीक इज बाब उकं भलीकै नि दिन।  उकं सब जणि नान भौं समझ बेर चणै दिनी।वीक सब बात लै पुर तरिकैल नि शुणन।  तब तक इजैल एक बताश म्यार हाथन धर बेर कौ "चल खाण खा, फिर किताब पढ़लै।"

"यो इजलै गजब छु मेरि बात तैल पुर शुणी न्हां,भुलगे कि!" "लै आ खा गरम रोट"चनिल कौ।  "तुलै आ दगड़ै खानु, बाबू लै न्हातिन यकलै नि खान्यू।"  "उणयूं,तुशुरू कर"  तब तक चनि लैआपण थाय ल्हिबेर पुजगे पवनाक तीर।
"इजा मैं तुथैं कुणौ छी नै कि उ ठुल गोदामाक बगल में," "होय होय,खाण में ध्यान दे, खाण बखत बात निकरन।" पवन फिर चुप है बेर खाण लागौ कि खै बेर पुर बात इजकं बतूंल।

जैसै पवनैल खै बेर हाथ धौईं तो फिर कूण लागौ कि ठुल गोदामाक बगल में तो तुरंत चनि कूण लागी "आब खै हैलौ पढ़ाय कर अघिल हफ्त बै टैस्ट छन"।  पवन उदास है गो कि "मेरि के बात कं यौं लोग ल्याखै नि लगून,शुणनै न्हातिन"।  वीक मन भौ कि एक जोरैल कै द्युं कि पैल्ली मेरे बात शुणौ तब पढ़ुलपर वीक हिम्मतै नि भै।  चुप्प है बेर आपण कौपि किताब देखण लागौ।

ऐल उ टीवी लै नि देख सकन सिर्फ ऐंतवाराक दिन एक घंट रत्तै और एक घंट ब्याल हुं देखणौक नियम छु।  पवनाक घर में भौत्तै नियम छन।सब कुनी जेठबौज्यूक च्योल दिनेश दा जौ बणन छु ठुल मैंस।  दिद और दाद तो बचि ग्यान ठुल मैस या और ठुल लै बणी जाल पै,दिद तौ भिंज्यू दगै डाक्टर छु और आय लै पढ़नै लाग रै, दाद हौस्टल में आपण पढ़ाय पुर करणौ।

मैं यां छुं पर यां इज-बाबनाक इतु नियम कानून छन कि के करूं?  कैसी और कभत आपण मनै जै करु? है जैं।  एक बात तो जाण ल्हियौ सब कि मैं 'पवन' आब नानतिन न्हांतू।  मेरि बात कं सब ल्याख लगाऔ।   अरे पुर एक घंट मैल सोचनसोचनै बर्बाद कर हालौ।  पवन फिर से पढ़ाय में लाग गो।  बीच में चनि ऐबेर उकं दूद दिगेऔर वीक खोर पलाश बेर प्यार कर गे।  पवन कं आब तौ पलाशण पुचकारण भल नि लागन, उकं सब समझ उं कि सब उकं 'भौ' समझनी।

इजाक आपण कम्र में जाणा बाद वील ऐन (आयना) में आपण मुख चा तो उकं आपण मुख में कुछ कुछ मोछ(मूंछ) जा दिखीणी तो उ भौत खुश भौं कि चलौ आब तौ कुछ दिनन में सब उकं सयाण समझ बेर वीक बातनकं ल्याख लगालै।  फिर मनैमन खुश हे बेर पढ़ाय करते करते उकं नींन ऐगे और वीक इजैल वीक हाथबै किताब उठै जाग पर धरी, उकं ढका और फिर वीक मुख चुम बेर आपण कम्र उज्याण जानी रै।

रत्तै जब चनिल उकं उठा और कौ "कब होलै तु सयाण,कब करलै आपण मनैल पढ़ाय लेखाय, इतु अबेर हैगे उठ तैयार हौ और स्कूल जा।"  पवन अल्बलांनै उठौ"ऐन में आपण मुख देखौकि हैं वीक जुंग(मूंछ) कताण भयीं।  फिर रोजैकि न्यांथ स्कूल पढ़ाय, घर खाण, इजसबै भौय।  बेलियैक अधुरि बात उ आय जांलै बतैइ नि सक।  अचानक पवनाक मन में आ कि जेलै बात ,पेटक्यूड़ि, मंसुब वीक मन में ह्वाल उनन कं उन एक नोटबुक में लेखनै रौल फिर सबन कं पढन हुं दिद्योल, सब वीक मनैक बात लै जाण ल्हाल और उकं सयाण लै  समझण लागाल, पर अल्लै कैसी लेखूं, अघिल हफ्त बै वीक टैस्ट लै छन बज्यूंण।

टैस्ट पुर हुण पर लेखुंल, तब तक तो भुल जूंल।  ऐस करनूं नित्यनियमैल रोज एक घंट लेख ल्हीयूंल। फिर पढ़ाय फिर खेल।  कै इजैल म्योर लेखी पढ़ ल्ही तो?  तो के हैरौ पै आफि पढ़ें समझ जालि।  इज बाब कैं रिशै ग्याय तो!  हाय, मै कै हुणयुं इतु परेशान तब जांलै तो म्यार मोछ लै ठुल हैयी जाल।

मौलिक
अरुण प्रभा पंत, 27-10-2020

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