सांग-धर्मरथ संवाद....

कुमाऊँनी व्यंग्य-ऐल विश्व में कोरोना नामक महामारी चलि रै।  मेल मिलाप, सामाजिक और धार्मिक क्रियाकलाप सब बन्द छन, सब घर भीतरै बैठि रईन।  Kumaoni Satire on couple relations in Corona Pandemic period

सांग-धर्मरथ संवाद....
(लेखक: विनोद पन्त 'खन्तोली')


अलमाड बटी छपणी कुमाउनी मासिक पत्रिका पहरू क मई अंक में प्रकाशित हास्य रचना "सांग मुनि-धर्मरथ संवाद।  आपु लोग ले यो पत्रिका मगैबेर पढ सकछा. पत्रिका डाक द्वारा ले मिलि जां . . पत्रिका बार जानकारी लिजी कमेन्ट बाक्स में सवाल पुछि सकछा
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कलियुगक प्रथम चरण चलि रौ, सन् २०२० कि मध्य काल चलि रौ, मुनि सांगदेव क आश्रम में भोर कि बेला छ।  मुनि स्नान ध्यान करिबेर आपुण आसन में विराजमान हैगेईन।  उनार सामणि उनार आश्रमाक शिष्य मुनिकुमार बैठी छन।  कुछ मुनिकुमार चाहा लिबेर ऐगेईन पैली एक गिलास में दडबकव चाहा और मिसिरिक कणिक मुनि सांगदेव ज्यू क अघिल बटी धर गो।  फिर डिस्पोजल गिलासन में चाहा सब मुनि कुमारानाक लिजी ले ऐगो।  सांग मुनि लि आपुण शिष्य वक्रपाल कें आदेश दे कि- वत्स एक कटोर लिबेर आ।   चाहा गरम हैरौ, कटोर में चाहा सेवै बेर पीन और जरा देवी सत्यजीता क बणाई खजूर ले लिआये खालि चाहा पेट में जलन करौं। 

हालाकि मुनि सांगदेव चाहा क विरोधी छी पर यो कलिकालक प्रभाव कै सकछा या मुनिकुमारनक आग्रह कि सागंदेव कैं आपुण आश्रम में चाहा क परमीशन दिण पडी।  चाहा पाणि खतम हई बाद मुनि उपदेश दिण लागी
हे मुनिकुमारो मीलि तुमन कें वेद वेदान्त, पुराण, सब चीज समझै हाली आब के शंका छ तो पुछो या के और चीज पुछण चांछा तो वीक से समाधान करि जाल।   

यो शब्द सुणते ही उनर एक प्रिय शिष्य धर्मरथ उठौ और कूण लागौ, "हे गुरुदेव, तुमलि हमन कैं सब प्रकारलि योग्य बणै है।" सब वेद शास्त्र नक हमन कैं ग्यान प्राप्त हैगो, प्रभू हमन कैं आश्रम भीतर बहुत समय हैगो।  भ्यैरैकि दुनियकि हमन कैं के ले खबर नहां, भगवन हमन कैं यो बताओ कि दुन्नि में कि हैरौ आजकल!

सांगदेव ध्यानमग्न हैबेर कूण लागि, हे धर्मरथ.. मी आपुण दिव्यदृष्टि लि देखणयू कि ऐल विश्व में कोरोना नामक महामारी चलि रै।   यो विषाणु जनित एक रोग छ, ऐल सम्पूर्ण विश्व यो महामारी क चपेट में छ।   यो महामारी एक मानव बटी दुसार में सिलकणी छ।   तबै सरकारैलि सबन कैं घरन में लाँकडाउन करि राखौ, सबन कैं सामाजिक दूरी बणूण जरूरी छ।   हर तरफ हाहाकार फैलि रौ, आपस में मेल मिलाप, सामाजिक और धार्मिक क्रियाकलाप सब बन्द छन, सब घर भीतरै बैठि रईन। 

धर्मरथ- हे गुरुश्रेष्ठ तब तो भौते गजबजाट हैगो हुन्योल!  गुरुदेव यो बताओ भीतर भीतरे मनिखनाक दिन कसिके काटीणईन, कि दिनचर्या हैरै....

सांगमुनि -- हे धर्मरथ . सब घरन में क्याप जस हैरौ, जे स्यैणि बैग दिन भर दूर दूर रूछी और ब्याल बखत मिलछी उ आब दिन भर दगडै रूण पर बाध्य हैरीन।   जां नान नान जस मनमुटाव हूंछी आब वां लडै झगडक स्वरूप काटाकाट में बदई गो।   हे शिष्य, कति बैगैलि स्यैणिकि झाकरि उचेड राखी और स्यैणि लि आपुण बैगाक बरमान में बेलण मारि बेर तामि खोरि में गूमड बणै राखौ।   कति कति स्यैण बैगनाक झगड में नानतिन्योई जस ले हैरै।   बैगलि स्यैणि कैं चिमुटि काटी तो स्यैणिलि बैगाक हाथ में दातिकि काटि बेर गोल गोल घडि जसि बणै राखी, दिन में गावागाव तो द्वि चार बार आम बात हैरै।

धर्मरथ - हे गुरुदेव, तब तो बहुत भयानक स्थिति हैरै पैं, तौ तो अराजकता भै!  तसिके कसिके काम चलौल!

सांगमुनि - ना वत्स.. बिलकुल तसि बात ले नहांति, तौ एक पक्ष छ, दुसर पक्ष तौ भौते मजेदार छ।   जनर नई नई ब्या हैरौछी, या ब्या करी चार पांचै साल हैरैईन उनार लिजी यो काल वरदान बण रौ।   यो प्रजाति क बैग घरवालि कैं प्रसन्न करणाक नई नई तरीक खोजण में लागि रईन और कुछ बैग जो घरवाई कैं देखिबेर कम्पायमान हुनी उ ले घरवालिक सेवा में लागि रईन।   उ लोग घर क झाडू पोछा लिपण घंसण, भनपान, कपड घ्वैण करण लागि रईन।   हे वत्स यो करोनाकाल में कई पति तकनीकी शिक्षा बटी ले दक्ष हैगेईन।   स्यैणिनैलि कूटि कूटि बेर उनार भीतर टैलेन्ट भरि हालौ।   आलू क बराबर टुकुड काटण, रवाट बिलकुल गोल गोल बणूण, रवाटन कैं डाब जाल फुलूण, साग दाल में लूण डालण क प्रमाण, कपडन कैं रगड रगड बेर साफ करण, लुवै कि कढाई कें चांदि जस चमकूण आदि कामन में कई मर्द नैलि विशेष दक्षता हासिल करि हाली। 

धर्मरथ - गुरुदेव यो वाल बातन कैं जरा और विस्तारलि बताओ.. रंगत जसि उणै।  कल्ज में कुतकालि जसि लागणै। 

सांगमुनि- वत्स उ पति जो बार बार घरवालिक कोप बटी बचि बेर घर बटी भाजिबेर न्है जांछी, होटल में खाण खांछी, उनन कें यो करोनाकाल में पितर याद ऐ गेई  मरता क्या न करता,  घरवालि क सत्ता उनलि स्वीकार करि हाली, आखिर भूख कब तक थाईं बिचारना बिती।  आब तो स्यैणिक आँखन देखबेर उसके डरन बैठगेई जसिके डंगरि कैं देखबेर छौव डरन बैठ जां।  हे पुत्र धर्मरथ, कुछ पति लोगनलि आपुणि घरवालिकि इदुक स्याव करि हालि कि उनरि पैतालीस किलो कि काकडै कि जस फुल्यूडि पिच्यांनबे किलो कि कद्दू जसि हैगेब्यूटीपार्लर बन्द हुणा वीलि कदुकै पति आपुणी घरवालि कैं देखबेर झसकी पडनई।  कयेक पति तो आपुण सिरान डंगरि खीम सिंग क मन्तरी बिभूत डालिबेर सितण लागि रईन

यो बात नै कि तसि हालत स्यैणिनकि हैरे, नाई कि दुकान बन्द हुणा वीलि जो बैग दाडि तो बणै ल्हिणीन पर बाल काटणै समस्या हैरे उनार बाल यास हैगेईन कि साक्षात त्रिजटा जास लागणईन।  कुछ बैग जो आपु हाथैलि दाडि ले नि बणै सकन, उ जब आपुण बालकनी बटी भ्यैर कैं चांणीन, तो यास लागणौ मानो भालू चिडियांघर क पिजर बटी चाण लागि रौ।  बिचारनाक ख्वार में जूंग अलग विचरण करनईन, खालि खोर ध्वैण में डेढ किलो सर्फ क थैल लागणौ।  सापुण क टिक्की कि पेश नि जाणई

धर्मरथ- गुरुदेव, यस आपत्तिकाल में पति और पत्नी क कि कर्तब्य छ?

सांग मुनि- हे धर्मरथ, पति क कर्तब्य छ कि घरवाई दगाड पंग न लिबेर यो काल कैं कर्म नैकि गति मानबेर पत्नी सेवा करौ।  टैम बेटैम घरवालिक खुट दबाओ, भुलि पडिबेर ले मुख लागणाक काम नि भै।  और पत्नी क कर्तब्य छ कि ऐल मौक मिल रौ जदुक सादि सकछा सादो आपुण बैग कें  तुमरि सासु लि मुख लगैबेर जदुक ले बिगाडि राखौ तुमर बैग, ऐल सुधार कर सकछा।  ऐल जदुक आपुण प्रभाव जमालि क्वे स्यैणि भविष्य में उदुकै भल फल मिलौल।  और हां हर पत्नी कैं बीच बीच में प्यारा क द्वि वचन ले जरूर बुलाण चैनी ताकि बैगक मन ले मानी जाओ।  ज्यादे परेशान करला तो दाढि बाल तो बढि रईन पति लोगनाक घर बटी जैबेर जोगी ले लकनन, फिर पछतांण पड सकौं

धर्मरथ- हे मुनिराज, शहरन में बजारन में कि हाल छन?  कृपा करबेर बताओ

सांगमुनि - हे धर्मरथ, मी आपुण दिव्य दृष्टि लि देखण लागि रयूं कि बजार खालि हैरीन।   हर चौराह पर पुलिस मुस्तैद छ, जो लोग सरकार क आदेश न मानबेर भ्यैर जाणईन पुलिस उनन कें योगा करूणै।   दोपहर में कई चौराहन में बजारन में बहुत लोग मुर्गासन करते हुए दृष्टिगोचर हुणीन।   कई पुलिस वाल भिकान आसन करवाते हुए उनन कें फुदकणक आदेश दिणईन।   यदि फिर ले नि मानणाय क्वे दुष्ट तो कुछ पुलिस वाल डन्डास्त्र चलैबेर उनर पृष्ठभाग में धनुष कि आकृति अंकित करै दिणीन।   फिर उ दुष्ट लोग त्राहिमाम त्राहिमाम करते हुए घर ऐबेर टोटिल कैबेर शयन करते हुए हल्लू नामक खाद्य पदार्थक सेक करै मागणीन।   हे धर्मरथ, यो लोगनाक वजहैलि बाम बणूणी कम्पनी वालनाक टर्नओवर में अचानक वृद्धि हैरै। 

धर्मरथ - हे गुरुदेव... तुमार यो वृतान्त सुणबेर और जाणनैकि इच्छा बलवती हुणै और बतूणकि कृपा करो गुरुदेव।

सांगमुनि- हे शिष्य .. यो करोनाकाल में जो चीज सबसे ज्यादा दुखी करनै उ छ, घर घर कुडि कुडि कवि पैद हैगेईन।   जो रनकान कैं अ आ याद करूण में मास्टर नाक गाव गाव ऐ गेछी उनैलि कोरोना पर महाकाब्य लेखि हालौ।   जनरि इमला में लेख इदुक खराब छी कि यस लागछी कि कौपि में ढोव (एक प्रकाराक कीड) पडि रईन उ कवि लोग रोज एक कविता टाइप करिबेर सोशल साइटन में डालिबेर लोगन कें पकूण लागि रईन।

जनन कें कविता लेखण तो दूर भलीकै कविता पढन ले नि उनि उ कवि पत्र पत्रिका क सम्पादक नक पास बोरी भरिबेर कविता प्रकाशनार्थ भेजणीन।   कुछ सम्पादक उ कविता न कैं पढिबेर पगली गेईन, बदबौयेट करण लागि गेईन।   उनार घर वालनैलि कदुकै उचैण धरि हालौ पर बीसकि उनीस नि हुणै।   साहित्य में नोबेल पुरस्कार दिणी वालि सस्था लि इन कवि नक थिरथाम करणा लिजी इनर पास नौ कटोर भेजि बेर नौ ब्याल पुरस्कार तक दि हालौ पर इनरि भयानक कविता लेखन में कमी नि ऐ रय।   सुण में उणौ कि सरकार आब कविता लेखण और छापण पर प्रतिबन्ध लगूणकि तैयारी में छ, नि रौल द्याव नि बणाल छिलुक।
(धर्मरथ यो सुणबेर कम्पित हे गे और वीक हाथ पैर शिथिल है ग्याय, उ द्विये हाथ जोडबेर कूण लाग)

धर्मरथ -- हे गुरुदेव, यो करोना कालक अन्त कसिके होल? यै लडाई कसिके लडी जाणै??

सांग मुनि - हे शिष्यश्रेष्ठ, आपस में दूरी बणैबेर, सफाई धरिबेर, सरकारि निर्देषनक पालन करि बेर, हे धर्मरथ! यो कोरोना खिलाफ जो योद्धा युद्ध करण लागि रईन उनर समर्थन करिबेर, हम लोग ले यो लडाई में भाग लि सकनू।   आब जाओ वत्स.. हवन यग्य कि तैयारी करो।   हन ले कोरोना योद्धा.. डाँक्टर, पुलिस वाल, सफाई कर्मचारी, जरूरी काम न में लागी सरकारी कर्मचारी नक नैतिक बल बझूणा लिजी यग्य करनू

(सांग मुनि क आश्रम में अग्नि कुण्ड प्रज्वल्वित हैगो, मुनि सबन कैं शपथ दिलूणी..  हम सामाजिक दूरी क पालन करूल, हाथ बार बार ध्वैल, जब तक जरूरी नि हौ भ्यैर नि निकलू।   अगर आसपास क्वे भूख होल तो वीकैं आपुण खांण बटी एक गास तब ले दयूल।)
आश्रम बटी हवनैकि आवाज उणै...
ऊँ पुलिस देवाय नम:
ऊँ डाक्टर देवाय नम:
ऊँ मेडिकल स्टाफाय नम:
ऊँ सफाई कर्मचारी देव्ये नमो नम;
ऊँ भारताक लोगाय नम: .
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विनोद पन्त' खन्तोली ' (हरिद्वार )
M-9411371839
विनोद पंत 'खन्तोली' जी के  फ़ेसबुक वॉल से साभार
फोटो सोर्स: गूगल

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