
हामु चाणी मास्साब और लाइब्रेरी किताब
रचनाकार: राजू पाण्डेय
अजीब विडंबना हैं ऐसे समय में जब सरकारे बड़े बड़े वादे कर रही हो और छात्रों को स्कूल, कॉलेज में अध्यापकों और पुस्तकालय में पुस्तकों की मांग के लिये सड़कों पर उतरना पड़ रहा हो, पिथौरागढ़ (उत्तरांचल) के छात्रों और अभिभावकों ने गजब की मिसाल पेश की हैं। धिक्कार हैं ऐसी ब्यवस्था को ऐसी सरकारों को।
सत्ता में पैठी ग्या ध्युडा
भितरे भितर छाणी हालो
क्या भलो पहाड़ आपुनो
भली के पिछाड़ी हालो।
जागी जा हो कुम्भकरणों
उठ जागी जा बल
सुणि ली मेसो की वाणी
नत पछताला भल।
णी मांगन्या आरक्षण
णी कोई खिताब
हामु चाणी मास्साब
और लाइब्रेरी किताब।
पैली हमरो हक मारो
तब बिरानी सरकार
अलग राज्य बणी फिरि ले
रुणा की दरकार।
बदलो नीयत आपुनि
दियो हमुरा अधिकार
नन्तिना रोड में बैठी
सत्ता त्वेके छ छिक्कार।

शब्दार्थ:
ध्युडा - दीमक। छाणी - खोखला।
मेसो - जनता। वाणी -आवाज।
नत- नही तो। भल - कल।
चाणी- चाहिए। मास्साब - अध्यापक।
बिरानी- परायी। रुणा - रोना।
त्वेके - तुझे। छ - हैं।
~राजू पाण्डेय, 10-07-2019

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