
शकुनाखर (नौव सेऊंणौं गीत)
तारा पाठक (आमा कोचिंग सैंटर)
ए जल पूजन,
हो जल पूजन जाऊं।
तुमरे रामी चंद्र,
तुमरे लछीमण जल पूजूं।
ए पंचताई , अहो पंचताई मोलाई,
तुमरी सीता देही, तुमरी बहूराणी कुलबधू।
ए पंचताई,अहो पंचताई मोलाई,
लाल जरिद की पहुँचियां, रतन जरिद की पहुँचियां।
ए जल पूजन, हो जल पूजन जाऊं,
तुमरे (परवारा बैगों, च्यालों नाम)कु ल पूजूं।
ए पंचताई, अहो पंचताई मोलाई,
तुमरी (परवारा सोहागिली सुंदरी, मंजरी, खंजरी नाम) कुल बधू।
ए पंचताई,अहो पंचताई मोलाई,
लाल जरिद की पहुँचियां,
रतन जरिद की पहुँचियां।
(शुभकाज में नामकंद,जन्यो और ब्याकाज भली में निभि गयो त नौव सेऊंणैं रीत छ। पैंली बटी पाणी संस्साधन केवल नौव भाइ ,जै नाम पर नौव सेऊंण पडौ़। अच्यालों घरा अघिल पाणी नल धैं लै नौव पुजि ल्हिनी ।पाणिकि महत्ता हमार पुज संस्कारों में लै बणी हुई छ। नामकंदक् नौव सेऊंण में च्यलै छट्टी ब्वेई चौख लै नौवै धैं ध्वैंनी।मात्रृक चौख ,अक्षत-पिठ्या ,फूल बताश,नैबेद,बात,कंकण,भरी कलश ल्हिबेर जनानी यो गीत गानैं नौव जानी,वां जै -च्यलौ ब्या भय त ब्योलि द्वियै मकुट पैरिबेर नौव ऐं,चेली ब्या में केवल पुजै साज धरनी। नौव जै ब्योली मकुट लै सेवाई जां।चौख कैं ध्वेबेर उ में खोडी़ निकालनी ,अक्षत पिठ्या चढै़बेर नौवै पुज करी जैं।)
फोटो सोर्स गूगल

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