जं जांलै ज्यून छुं


--:जं जांलै ज्यून छुं:--
(जब तक जीवित हूं)
लेखिका: अरुण प्रभा पंत

आज भाऊ ऊंणी छु।  साफ सफाय तो कर हाली, पाणि लै सार है लौ।  ऐस सोचन सोचनै जिबुलि काखि आपण खोर कन्यूण लागी(अपना सर खुजलाने लगी)।  को सबै ल आल पत्त नै, उसी द्वियै बस तो उनि यो बाट बै (रास्ते से)।  भितेर भाउक (बेटे की)अल्मारि और दिशाण (बिस्तर) बेय्यै (कल ही) फिट कर दें मैल, आय लै मैं में (मुझमें) काम करणैक हमक (जोश) भयी।  उतार कारबार समाय (संभाल) राखौ मैल, आय लै करणै लागि रैयू।

अज्यान यो रोपै (रोपाई) करि बाद खुटन में जो कत्या (पैरों की उंगलियों के बीच जै त्वचा गलने लगती है athletic's foot) लाग गो और खाजि(खुजली)लै भौत्तै है रै,धधोड़द्यू (जोर से खुजलाना) मन करणौ (मन कर रहा है)।  यो सरीराक ब्याधि कभै दांत पीड़,कभै घुनन में तकलीफ पर काम तो उसै भौय।  मैं लै मीराक (मीराकी) इजाक न्यांथ (तरह से) आपणै लैकौक काम करन्यु तौ म्यार बुति धाणि लै कम है जानि पर मकं आपण परिवार कं घरौक शुद्ध खाण पिण घ्यु,घरौक पिस्यु (घर का आटा) दिनांक वास्ते और नानतिननैक मार बै तबै लागि रैयूं नंतरि बुबोज्यू और और इनार मरि बाद इतु जंजाल करणैक के पड़ि रैछी मैलै आपणै लैक कारोबार कर सकछी पर आपण पराण और तरांण (जीवन व ताकत) रूंण जांलै नानतिन गाव में अटिक जानेरै भाय।यो मेरि ममता कं को समझूं,मकं तौ आपण फा नानतिननैक फाम छु, नानि सुधा कं छाड़िबेर सबै यो घर में म्यार ब्याक बादाक पैद भाय, सबनकं मैल पाई सैंतौं (पाला पोसा) सब्बै म्यारै भाय।

हमार यांक जा उर्दैक दाल, सुंदरि धान,जामीर, निम्मू, (एक प्रकार के खट्टे फल) घरौक घ्यु मैं सबन हुं धर राखनू और जब सब मक खाण बखत याद करन्हालतो मकं यैं बटिक संच (चैन, शांति)पड़ जैं।  हरीशाक बाबू कुनेर भाय" तु जिबुली कै ततु माय करछै क्वे निकरन हमन कं याद,म्यार मरि बाद तु आपणै लैकौक करिये और सब अधि(अधिया) लगै दिये,एक गोर पाइये और के करणैक जरवत न्हैं,तुहूं ततुकै मस्त भौय।"

आब ऐल तौ भाऊ ऊंणौ तकं के तकलीफ निहोलि अगर मैल यां कारोबार नि करि हुनौ तौ म्योर भाऊ कां रूंन।  अरे आब तौ दुसर बसौक टैम लै है गो नि पुज आय जांलै।  थ्वाड़ देर में एक जीप जिबुलिक माव (दरवाजे)थैं पुजि ,उमैं जिबुलिक भाऊ पूरन आपण दगड़ुवाक दगै पुजि भौय तालै द्वीनलै जिबुलि थैं नमस्कार कौर जिबुलिक मन आपण पूरन कं अंग्वाल हालणक मन हैरौय पर पूरन तो सब जाग देखूण में रौ आपण दगड़ु कं,बैठ पोथा, मैं चहा बंणूनू,नै के निचैंन।हम मलि होटल में ठैर रैंयाऔर नाश्ता चहा कर बेर ऐरैयां।

असल में यो जाग हम सब भैबैण बेच दिण चाणयां (बेच देना चाहते हैं) सब बात है गे बस जो खरिदणौ वीक च्योल छु यैक मंशा योदेखणैक छी।  तु बस कुछ कागजन में आपण अंगुठ मार दे।

तब जिबुलि कं के कुणै नि आय और फिर वील आपण दातुल उठा और जोरैल गरजी कि तु कों हुं छै हमैरि थात कं बेचणी, भाज यां बै नंतरि मैं पुर गौंकं बुलूनू,आज जांलै जो जिबुलि यो जागैक पहरू छी आब तु जसनैक भक्षक बण सकें।  तु यांबै भाज नंतर त्यार हत्या है जालि म्यार बुदि।

मौलिक
अरुण प्रभा पंत 

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