भिटौला

विवाहित महिलाओं को चैत्र के महीने में अपने मायके से भिटौली,Bhitaula is a tradtion of gifting married daughter in chaitra month,Bhitaula ya Bhitauli parampara

भिटौला

लेखक: नीरज चन्द्र जोशी

भिटौला शब्द भेंट से बना है जिसका शाब्दिक अर्थ मिलना होता है। इसमें शादीशुदा लड़की के मायके वाले अपनी बहन या बेटी से मिलकर उसे उपहार देते हैं। यह परंपरा सिर्फ उत्तराखण्डवासी ही निभाते हैं। विवाहित महिलाओं को चैत्र के महीने में अपने मायके से आने वाले भिटौले का इंतजार रहता है।

शादी के बाद का पहला भिटौला लड़की को उसकी डोली की विदाई के समय ही दे दिया जाता है। उसके बाद जो पहला चैत का महीना आता है उसे काला महीना कहा जाता है। लड़की उस महीने अपने मायके में ही रहती है। चैत्र महीने की ५ गते तक विवाहित महिला द्वारा उस महीने का नाम लेना वर्जित होता है। भिटौले की शुरुवात कब से हुई इस से संबंधित कई कहानियां प्रचलित हैं। जिसमें से एक इस प्रकार है- ईसा पूर्व कूर्मांचल के एक गांव में सचदेव नाम का युवक रहता था। उसकी बहिन का विवाह नागवंशी राजा काली नाग के साथ हुआ था। जब उसकी बहन का विवाह हुआ तब सचदेव बहुत छोटा था। जैसे जैसे वह बड़ा हुआ और जब शादी के कई साल बीतने पर भी उसकी बहिन मायके नही आई तो सचदेव को अपनी बहन की याद सताने लगी। एक दिन वह उससे मिलने गया। जब दोनों भाई बहिनों की मुलाकात हुई तो दोनों गले मिले। तभी अचानक काली नाग वहां आ पहुंचा। दोनों को इस अवस्था में देखकर वास्तविकता जाने बिना वह बहुत क्रोधित हो गया। उसने क्रोध में अपनी पत्नी और उसके भाई से अपमानजनक बातें कही और बिना उनका पक्ष सुने उन्हें महल से निकाल दिया। अपमान का घूंट पीकर दोनों भाई बहिनों ने आत्महत्या कर ली। जब बाद में कालीनाग को सच्चाई का पता चला तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ। माना जाता है कि तभी से दोनों भाई बहिनों की याद में भिटौले की परंपरा प्रारम्भ हुई।

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