क्ला?

मूनै बुकाये झा क्ला? kumaoni poem about double standards, dogale svabhav par kumaoni kavita

क्ला?

रचनाकार: राजू पाण्डेय

देखना चाना में तुम फूल बुरांश भया
मुख खोलना ततु, तितो करेला झा क्ला?

कुरकुरानी दिरै मुखडी यौ भगवानै लै
जब लै देखनु यौ, मूनै बुकाये झा क्ला?

बैठको में अवाज भलि सूनी
बोलन चालन में तुम, फुटि दमू झा क्ला?

आजै की बात में भल टिकाना ना
बदलछां ततुक तुम, छैपाडा झा क्ला?

आस पासै खबर बठै अनजान छ
सी रहा ततुक तुम, कुम्करण झा क्ला?

मानसौ के मानस समझना ना तुम
चढ़ि रहा अति अगास, रावण झा क्ला?

शब्दार्थ :
देखना चाना - सुंदरता।
 भया - हो
तितो - कड़वा।
 झा क्ला - जैसे क्यों
कुरकुरानी - सुन्दर नैन नक्श वाली।  
दिरै - दी है।
मूनै -मधुमक्खी।  
बुकाये - काटे।
बैठको - कीर्तनों
फुटि - फूटे।  
दमू - नगाडा
भल - कल
छैपाडा - छिपकली।
सी रहा - सोये हो।
अगास - आसमान

~राजू पाण्डेय, 29-08-2020
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