जिम कार्बेट पार्काक् शेर......

कुमाऊँनी भाषा में शेर-शायरी, ज्ञान पंत जी द्वारा  Sher-Shayari in Kumaoni language by Gyan Pant, Kumaoni Shayari

जिम कार्बेट पार्काक् शेर......

रचनाकार:  ज्ञान पंत

बोट लगौ
फल'कि चिन्ता
नि कर
आफ्फी खानीं 
खा्ँण दे .....
योयी सोचि बेरि
एक बोट
आजि लगै है
"जमीन" में ....
सोचूँ , के पत्त
मेरि हरै रयी
जमीन
शैद मिल जाऔ
ययीं कती।
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जब तु आलै
भौत देर है जालि
शालु'क बोट
बुड़ी जा्ल ...
गौधारुँन 'क ढुँङ 
फरकी जा्ल ....
धन्नी - भराँण में
ध्यूड़ लागि जा्ल 
भरबाटुन'न 
किड़ पिटंङ बौयी जा्ल 
भतेर
जा्ँण जस ले नि हौ ...
द्वार ले
ढकी जानेर छन ...... 
आँखिर
पा्ख में पाथर ले
कब जाँणै
पौर्याल कै हरौछै .... 
दाड़िम - अनार मे
लागी फूल ले
सब झड़ि गियीं
तेरि इंतजारी में ....
ओखड़ , नाशपाति
नारिंङ ' माल्टा और
रिखू ढाँङ .....
सब नटी गियीं 
आ्ब
तु आले त
के करलै .... ?
को पच्छयाँणौ्ल
ते कैं और
मैं कैं ले।

शब्दार्थ:
आफ्फी -- अपने आप
गौधारुँन --- पहाड़ी पर
ध्यूड़ ------- दीमक
भरबाटुन ---- दुछतिया में
बौयी --- पगलाना
ढकी ---- बंद हो जाना
पोर्याल ---- देखभाल करना / चौकीदारी
नटी --- उजड़ जाना

June 02, 2017
...... ज्ञान पंत
ज्ञान पंत जी द्वारा फ़ेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी से साभार

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