कि ल्येखूं

कुमाऊँनी भाषा की कविता-कि ल्येखूं - Kumauni Kavita "Ki Lyakhun" what should I write, only what I got from god


कि ल्येखूं

रचनाकार: नवीन जोशी नवेंदु

कि दि सकूं मिं
कै कैं लै?

वी,
जि
मकैं मिलि रौ
दुनीं बै।
कि सुणै सकूं मिं
कै कैं लै?

वी,
जि
पढ़ि-सुंणि-गुंणि
रा्खौ यैं बै।
कि ल्ये्खि सकूं मिं
त्वे हुं?

वी,
जि
त्वील, कि कैलै
कत्ती-कबखतै
कौ हुनलै
कि ल्यख हुनल
जरूड़ै।

अतर-
काँ् बै ल्यूंल मिं
के, तुकैं दिंण हुं
के् सुणूंल तुकैं नईं?

के् ल्यखुंल त्वे हुं
अलगै
य दुनी है!
मिं, के
परमेश्वर जै कि भयूं।

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राष्ट्रीय सहारा कार्यालय, पॉपुलर कंपाउंड, मल्लीताल, नैनीताल। 
पिनः 263002।   उत्तराखंड।

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