अयोध्या आज कसि सजि रै हो

अयोध्या आज कसि सजि रै हो-कुमाऊँनी कविता,kumaoni poem describing beauty of ayodhya town,kumaoni bhsha ki kavita, kumaoni poem

अहा!  अयोध्या आज कसि सजि रै हो

रचनाकार: हिमानी

अहा!
अयोध्या आज कसि सजि रै हो
सर्ग धरति में जस उतरि गौ हो
सबै द्याप्त अगास में
ढोल बजूंणईं हो
यो बरस दिवालि साल मेंं
द्वि बखत होलि हो
यो सब देखि बेर जो रणी रईं
उनरौ त् दिवालौ भलि क्
निकल जालौ हो
रामज्यू सबूंक घट में बसनीं हो
यो उनर भक्त क् प्रेम छु जो
उनर लिजी सुण जस चमकिल
मंदिर बनूं रईं हो
मेर आमा कभै स्कूल नि जाईंछि
उनलि कोई गुरू ले निं करिंछीं
फिर ले वु हम नानतिनकै बतूंछि
नानतिनौ! जब ले तुम घुरिला
यात् तुमुन कै कोई कष्ट आल त्
कभै ओ ईजा, ओ बाबा झन कया
ओ रामज्यू कूण करिया
रामज्यू सब कष्ट हराला
रामज्यू तारण कराला
अहा!
अयोध्या आज कसि सजि गै हो
कतुक भल मंदिर बणि गौ हो
सबै जन अब रामज्यू कया
सबूंन कै घट में
तुमि रामज्यू कै देख्या हो
मंदिर बनण में जो रणी रईं
उनर घट में ले तुम
रामज्यू कै देख्या हो
अहा!
अयोध्या आज कसि सजि गै हो
धरति में सर्ग उतरि गौ हो.

--हिमानी ©, 04-08-2020
-सर्वाधिकार सुरक्षित

एक टिप्पणी भेजें

0 टिप्पणियाँ