मै-चेली और बौल बुति (भाग-०८)

कुमाऊँनी धारावाहिक कहानी, मै-चेली और बौल बुति, long kumaoni story about struggle of as single mother and her daughter, Kumaoni Bhsha ki Kahani

-:मै-चेली और बौल बुति:-


->गतांक भाग-०७ है अघिल->>

सबनैकि बोली ताना खिसै शुण, देख बेर द्वियै मै चेली डरन डरनै बिना कैकं परेशान किए आपण बाट् जानै रुनेर भाय। फिर लै कुछ मैसन कं हर बखत खरि खरि लागि रुनेर भै, एक दिन कैलै उनार बाट् में कान् (कांटे) हालि दीं नांगड़ खुटैल हिटणी जिबुलि और चंपाक खुटन कांन् बुढ़ि ग्याय कुंछा, "ओ इजा ओ बाबू" कै बेर द्वियै जणि भिमैं बैठ बेर आपण कान् गाड़न बैठीं तो बैठणी जाग लै कान् बुढ़ि ग्याय, आग लागौ।

अंधेर तंग करौ कुछ मैसनैल बिन बातै परेशान करनेर भ्या, बस कसूर इतुकै भ्यो कि उनन कं पढ़नैक लगन भै और आपण चेलिक ब्या उ अल्लै निकरण चानेर भै 'दूदैकि जई भै, अब फुंक फुंक बेर आपण चेलिक बाट् भल करणैकि मंशा भै, बस्स। खाणि कसिक खाणि कसिक तौयै दि उनन कं तो एक दिन हिम्मत कर जिबुलिल ठुल मास्टराणि थैं आपण व्यथा कै दि तो वील द्वियै मै -चेलिन कं आपण आवास में बुलै ल्हे और पधानज्यु थैं कै बेर उनौर घर में ताव लगवै बेर घरैकि देखभाल करणाक लिजि कौय। पधानज्यूल सबन कं बतै दे कि अगर जिबुलिक घर द्वार जमीन कं के नुकसान पहुचायौ तो सबनैकि खैर नै।

पधानज्यूल जिबुलिक पुर जमीन अधि लगवै बेर उनौर ख़र्च बंधवै दे और जिबुलिक गोर कं ठुल मास्टराणि आपण घर लियै। वैं रै बेर द्वियै मै चेलिनैलि ठुल मास्टराणिक घर-द्वार लै संभालौ और भलीकै पढ़ाय लै करि। ठुल मास्टराणि संगीतैकि लै शिक्षिका छि। उथैं चंपाल संगीत सिखौ और हारमोनियम बज्यूण लै सिख ल्हे। जब मन में भल भावना हैं तो बाट् बै बाट् निकय जां।

आब चंपा और जिबुलि शांत वातावरण और भल देख-रेख में रुणाय, उनार मुखन तेज और चमक ऐगे। बलांणौक शीप, आत्मविश्वास और पढ़ायिक तेज दिखीण भै गोय, संश (चिंता) कम है ग्याय। जब जिबुलि और चंपा पांच में छि तो ठुलमास्टराणि सेवानिवृत्त है गेय,अब फिर से रुणैकि और अघिलैकि पढ़ायिक चिंता जिबुलिक मन में हैगे कि अब कैसि के होल!--


मौलिक
अरुण प्रभा पंत 

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