
तेरी आदत यो मिकै ऐसी लागि गै
रचनाकार: राजू पाण्डेय
तेरी आदत यो मिकै ऐसी लागि गै
रात बैरात नींद उड़ा लि जांछे
ऊनि जानि यो पूछनौन मैस मिथैं
रोज पली धार आबैर कि चांछे
दिनभरी मि सुजा रुछु तू ना ऊनि
मेरा प्राणों की दुश्मन तू बनि जांछे
मेरा मनै का बुरांश सब खिली जानि
जब ऊना जाना में तू हसी जांछे
बिन काजल लगायै तू जिन भैर जा
सब त्वैके सुजुनौन जब तू जांछे
देखि "राजू" झुका आँखा शरमाछि जब
कलजै मे मेरा ठंडक गजब पाडि जांछे।
~राजू पाण्डेय, 18-07-2020

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