
-:उत्तराखंडाक नौल, पिणी पाणिक पुराणि व्यवस्था:-
लेखिका: अरुण प्रभा पंतजब मैंस कं तीस (प्यास) लागन्हैल तब वील खोजबीन कर न्हैल कि आपण शरीरैक यो मांग कं कैसिक शांत करूं? फिर पाणि जौ पदार्थ पर वीक खोज शांत भैन्हैल। हम हौ (हवा) बिना चंद मिनटाक पौण भयांऔर डेड़या द्विदिन जांलै पाणि बगैर रैसकनूं उहै ज्यादे तो मुश्किलै भौय। यो सबनाक बाद अन्य खाद्य पदार्थ उनेर भाय। कुछेक शाक पात फल लै हमैरि तीस बुझै सकनी पर आंखिर पाणि तो पाणि भौय।
जब बात उत्तराखंडैक चल रै तो हमार मुख्य पेयजल श्रोत धार और नौल भाय तौ मिनरल वाटर मैंस कं पूर्ण निरोग और फुर्तील धरनेर भौय। अतः मनखी नैल आपण रूणी ठिकाण जल श्रोतनाक तीर बणयी।शनै शनै वैं पुरि बसासत हैगेऔर जतु लै हमन कं पुराण संस्कृति सभ्यता मिल रैयीं सबै क्वे न क्वे नदी तीर छन।
ज्यों ज्यों मैंस सभ्य होते गो वीक पाणिक आवश्यकता बढ़ते गे। आब मनखी पाणिक एक सुव्यवस्थित व्यवस्था करण लागौ,जमैं हमार नौल प्रमुख रूपैल आपण स्थान धरनी।
नौल उत्तराखंड में भूमिगत जलश्रोत कं सीढ़ीदार जा डिजाइनाक एक ढकी छवैयी हुयी ढ़ांच हुछींजो पाथरनैल निर्मित एक ऐसि संरचना भै जमैं सबन है तली एक वर्गफुट चौकोर सिढ़िनुमा क्रमबद्ध पाथरनैक पंक्ति जकं 'पाट' कुनी,बै शुरू हुंऔर मल्कै हुं नौलौक आकार बढ़ते जां और ऐस लगभग आठ पाट हुनी एक नौल में।सबन है मल्के वाल पाट लगभग एक डेढ़ मीटर चौड़ाई लम्बाई या भौत जाग यहै लै ज्यादे लम्ब चौड़ नौल मिलनी नौलनाक मल्बै गुम्भदनुमा छत लै हैं।
अधिकतर नौलनैक छत चौड़ किस्माक पाथरनैल बणी हैं, जनन थै 'पटाल' कुनन।
इन नौलनैक दीवाल में क्वे न क्वे द्याप्त बणी हुनी और नौलनाक भ्यार पक्क पाथरनौक आंगण बणी हुं जैल नौलाक आसपास कच्यार निहौ। हर नौलाक तीर बोट जरूर हुनन जैसी पीपल बड़ बांज, देवदार, तिमिल। तौ नौल में पाणि आपण जाड़नाक द्वारा उण में और नौलौक पाणिक कं एक प्रकारैल उच्च गुणवत्तायुक्त बणयी रूण में सहायक हुनी। नौल वास्तव में आधुनिक टैंकी जौ भाय, पर नित्य शुद्ध जल युक्त।
प्राचीन मान्यतानुसार पाण्डवनैल उत्तराखंड में भौत नौल बणयीं बल। पुराण टैम में कत्यूरी शासकनैल लै मस्त (बहुत) नौल बणयीजैक प्रमाण मिलनी, उनूल हर गौंक देवालयाक लिजि एक एक नौल निर्मित करयीं बल। उसी तौ जैल जैल मैसन कं लाभ मिलौ जीवन रक्षा भै वीक वील पुज करणैक प्रथा बणै। जल श्रोत कं तो साक्षात विष्णु भगवान ,सूर्यदेव मानि गेयीं। कई नौलन में तो शेषशायी विष्णु और सूर्य आकृति मिलनी।
भगवान रूप में पूजनीय हुणा कारण सबनैल इनैरि साफ सफाई और देखभाल भली प्रकार करी। कुछ पुराण नौलनाक छत द्वार और खंबन में चित्रकारी विष्णु ,सूर्य सर्पऔर देवी देवतानैक आकृति उकेरी हुई मिली। भौत नौल तो अद्वितीय शिल्पकलाक नमुन छन। अनेक दानशील व्यक्ति यो नौलन के बणूनी या उसमें सहयोग करनी नौलनैक साफ सफाई और रखरखाव पुण्यौक काज मानी जां। कभै आपण क्वे इच्छि पुरि हुण पर लोग नौल बणै दिंछी।
आब मैं आपण जाणि माणी प्रसिद्ध नौलनाक बार में क्रमवार बतूणौक प्रयास करुंल:--
सबसे पुराण चंपावतौक
- बालेश्वरनौल जकं थोरचंद नामक चंद रिजैल १४२० में बणा, जमें आय लै लबालब पाणि भरि रुं बल। उसी तो यमैं विष्णु भगवानेक मूर्त्ति बणी छु पर एक मूर्ति बुद्ध भगवानैक जै लांगें बल।
- चम्पानौला,
- घासनौला
- मल्ला नौला
- कपिना नौला कपिना
- सुनारि नौला खोल्टा
- उमापति नौला
- खजांची नौला
- हाथीनौला
- डोबा नौलां
- दुगालखोला नौला
अनगिनत नौल छन हर गौं में कमसे कम तीन चार नौल तो हुनैं छन। पर सबै आब खस्ता हालत में छन और समाप्ति ओर छन।

इन सब पुराण जल श्रोतनैक दयनीय व्यवस्थाक कई कारण छन:-
- नल द्वारा जल वितरित करणाक कारण लोग नौल बै पाणि तबै ल्यूनन जब नल में पाणि नि आय,अन्यथा क्वे नौल बै पाणि ल्यूणैक कष्ट नि उठून अतः नौल उपेक्षित होते जांणयीं।
- भूजल स्तर कम हुणाक कारण नौल सुखण लाग गेयी ।
- नौलनैक साफ सफाई और रखरखाव नि हुणा कारण उनौर जल श्रोत बंद है चुक गो।
- भूस्खलन , भूकम्पाक कारण नौलनौक जल उद्गम बंद है चुक गो और नौल सुक ग्यान।
- पैल्ली हमार बुजुर्ग लौंडमौडन कं दगाड़ ल्हिबेर खाव,गूल और नौलन कं संरक्षित करछी, आब न बुजुर्ग रैग्याय न पहाड़ाक लौंग मौंड गौंमें छन अतः यो हमरि पुराणि पाणिक व्यवस्था जो वास्तुशास्त्राक अनुसार छी, कं चाणी चितूणी क्वे न्हां।
यो नौल हमार कुमाऊं गढ़वाल, हिमाचल प्रदेश और नेपाल में लै छन।
अल्माड़ शहर में एक जमान में ३६० नौल छि बल, पर आब जबकि जल संकट छु और यो नौल नैक भौत जर्वत छु पर नौल खत्म होते जाणयीं।
पिथौरगढाक अनेक नौलन में भौत कम नौल जीवित छन, कुछेक सुक गेयीं और कुछ प्रदूषित छन बल। आब केवल-
- खड़कोट नौल
- महादेव नौल
- चंद्र भागा नौला
- रई धारा नौला
- जाखणी नौल में पाणि छु बल।
नौल हमरि संस्कृति और धार्मिक धरोहर लै छन, हम नौलनैक पुज करनूं। जब लै क्वे शुभ काज हुं नौल पुजी जानी, नय ब्वारि नौलैक पुज करें वां बै कलश गगरि भरें, वां पकवान बणूनी, नाच करनी गीद गैनीं, तै लगूनी। आय लै प्रतीकात्मक रूप में हम भ्यार रै बेर लै नौल पुजनू शिशु जन्म में और नय ब्वारि आगमन पर।नौल हमार पूर्वजनौक एक ऐस प्रयास छु जकं पुनर्जीवित करणौक ,और सही प्रकारौक मिनरल वाटर प्राप्त करणौक श्रोत छु।
एक हथिया नौलाक बार में मैं फिर लेखुल तब तक यैक आनंद उठाऔ।
अरुण प्रभा पंत

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