
जिम कार्बेट पार्काक् शेर......
रचनाकार: ज्ञान पंत
मनखिना खा्प में ले
"मुवाँव"
अहा रे नेता
अहा रे चुनाव।
नेता
कूँण लागि रौ
वोट दिंण में
तुमा्र कि फाट्टि रौ।
चा्ड़ - प्वाथ
बाघ - भा्ल
कव् - कुकुर
और स्याव ....
इनन् ठोकि बेरै
हुनेर भै
नेता 'क चुनाव ....।
पाँच साल में
एक बेर
दर्शन दिनेर भै
लोकतंत्र में
असल् नेता
योयी हुनेर भै।
अभिनेता
आफि ना्ँचनेर भै
नेता
सबन् नचूँनेर भै।
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त्योर् के भरौस
कभै फूल त
कभै
खालि हाथ ऐ मरछै
वोट माँङणा लिजी
का्व-बिका्व करछै
पहाड़ में .....
सायकिल चलूँछै
जंगल काटि बेरी
हैंडपंप लगूँछै ....
रनकारा
तीर्थाटन में ले
शराब पिवुँछै ....
मनखिन कैं
बल्द' नै न्याँत
जां-तां भिड़ै दिंछै
अरे!
तु को छै .......
ओखड़ै न्याँत
पहाड़ फो्ड़ि खाँछै
जा्ग-जा्ग ....
तेरि पोल-पट्टी
सब खुलि जनेर छ
ऐला फ्यार
वोट - सोट त
केे मिलाल् ते कैं
मगर ......
पहाड़ जरुर
ढुँङ घुर्यूनेर छ।
मुवाँव -- जुताई के समय बैलों के मुँह बंद करने की जाली
January 2017

...... ज्ञान पंत
ज्ञान पंत जी द्वारा फ़ेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी से साभार
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