
शकुनाखर (नौव सेऊंण में सुहागिलियों चौख नचूंणौं गीत)
तारा पाठक (आमा कोचिंग सैंटर)
जैसा जैसा रामी चँद्र,
लछीमण पटवा मोलाला।
तैसी तैसी सीतादेही,
बहूराणी कनौई हलाली।
मंडला बाजे झूमि झूमी,
तरणी नाचे घूमि घूमी।
जैसा जैसा (परवारा बैगों, च्यालों नाम) पटवा मोलाला।
तैसी तैसी (परवारा सुहागिलियों नाम-सुंदरी,मंजरी,खंजरी) कनौई हलाली।
मंडला बाजे झूमि झूमी,तरणी नाचे घूमि घूमी।
(शुभकाज-नामकंद,जन्यो या ब्या में नौव सेऊंणैं रीत छ जैमें घर बटी नौव जालै घरै क्वे सुहागिलि ख्वार में मातृका चौख और हात पाणी भरी कलश ल्हिबेर अघिल अघिल हिटैं पछिल बटी और जनानी हुंनी, गिदारी बाट में (ए जल पूजन,हो जल पूजन जाऊं------) यो गीत गानैं जानी। नौव पुजि बेर जो पुजै साज लै रूनी (पुजै साज पैंल गीत में दि राखी)वील नौवै पुज करनी फिर बारि बारी सबै जनानी ख्वार में यो चौख धरि, हात में अक्षत ल्हि चौख नचूंनी और हाता अक्षत चढू़नै जानी।तब गिदारी (जैसा जैसा रामी चँद्र------) गीत आनी।
फोटो सोर्स गूगल

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