
पहाड़'क स्वैण
रचनाकार: रेखा उप्रेती
किलै नि देखुँ
रात ब्याँण'क
भल-भल स्वैण
धोs-धो
काटि रै
अन्ह्यार पट्ट रात
कभत्तै त
फाटै'लि कै
चै s रौ छी
आब
डाना'क पार
ललांग -ललांग जै
छाई
चितूणयुँ
आब्बै
सूणु'ल
बाट-घाटाँ में
मन्खि बलाँण
चड्नाँक गीत
गोरू-बाछाँ'क अड़ाँण
झिट्ट
आँख लगै लिनुँ
उज्याव'कि आस में
देखि लिनुँ
रात ब्याँणाक
भलाs भल स्वैण
(रेखा उप्रेती), 25-07-2020

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