
ज्यून् जियौ जंजाल्
रचनाकार: हीरा बल्लभ पाठक
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अरे जमराजा!
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
चार करोड़ है रयीं छै बणूंण दे
म्यर नान्तिन् म्यर् परवार छू
जरा इनूकैं समवण दे,
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
पै जथां कौलै उथां ऐ जूल्
अच्याल् कोरोना लै रौ
द्वी डबल आइ कमांण दे
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
मिल् कतुकै करतब करिबेर्
कमै रयीं कार कोठि बंग्यल्
जरा इनौर् स्वाद चाखंण दे
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
डबल् कमणक् चस्क लागौ
रात दिन क्ये नि द्यख
आइ मेरि उमरै क्ये छू,
तू ऐ गयै अचाणचक्
यस् लै पै भल् जै क्ये हूँ
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
सब्बै झुटि बलानीं यौ दुनीं में
मिल् अणकस्सै जै क्ये करौ
अपंणि औलाद ल्हिजी
जस् सब करनीं उस्सै मिल् लै करौ
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
चार कोठि छन् एक पार् काम लै रौ
ऊ पुरी जाल् त् पांच है जाल्
एक दिन ऊ कोठि भित्येर
चैनैल् सितंण दे मिकैं बस
चार दिन और ठैरि जा रे जमराजा ठैरि जा।
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हीरावल्लभ पाठक (निर्मल), 03-06-2021
स्वर साधना संगीत विद्यालय लखनपुर,रामनगर
हीरा बल्लभ पाठक जी द्वारा फेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी पर पोस्ट
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