आमा क दुःख - कुमाऊँनी कविता

आमा क दुःख - कुमाऊँनी कविता, kumoni poem about changing time and old people, kumaoni bhasha ki kavita

-:आमा क दुःख:-

रचनाकार: हिमानी

ईजौ घोर कलजुग आ गौ हो
क्याप ह्वैगो हो
कसु बखत यो आ गौ हो
घोर कलजुग छा गौ हो
मेर बौज्यू बतूंछी
चेली! घोर कलजुग
देखला तुम सबै
उनौर कून सच्च ह्वै गौ
कुकुर करौन आ गौ बल
सबन का मुख में
म्वाल लागि गौ बल
क्वै कैकि तरप न
देखनो बल।

ईजौ घोर कलजुग आ गौ हो
पोरू खन जन्यापुन्यूं ऊनै
जै के राखि कूनी बल
कुकुर करौन बाट में
ठाड. ह्वै रौ बल
मेरि रेबति अब
मैत कसिक आलि
कसिक त्यार मनालि
अपण दाज्यू क
रच्छा कसिक बांधलि?

ईजौ अपण दैवतान क
उच्याण राखौ सबै
जागनाथ ज्यू
बागनाथ ज्यू
गोल ज्यू
भोल ज्यू
गगनाथ ज्यू
सैम ज्यू
लाट ज्यू
दुनगिरि मैया
नंद देवि मैया
सबै मिलि बेर
सबूंक रच्छा करल।
इजौ घोर कलजुग आग्यो हो।।

--हिमानी ©. 26-07-2020
-सर्वाधिकार सुरक्षित

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