बयाव बताल - कुमाऊँनी गीत

बयाव बताल - कुमाऊँनी गीत, Poem in kumaoni language about the reality of life, kumaoni bhsha ki kavita, kumaoni kavitathe

"बयाव बताल"

कुमाऊँनी गीत
रचनाकार: मोहन चन्द्र जोशी
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याँ को आग् जगौल और को आग् निमाल? याँ के बतै सकों क्वे? य तो बयाव बताल। भल करि जाओ रे! य नानि जिन्दगानी, जब तक हाथ छु य पात जसि पराँणीं। भोल टुटि छुटली य माँटि मिलि जाली, कब तक रौली, य बयाव बताल।। नानछिनाँ दिन जाँणि कसि कटि जानीं? जवानी का दिन औरौं कैं दियो बाँनीं।। सुख-दुख बाँनि ल्हियो, बुलै मिठि वाँणीं, पुर कभैं हनीं न्हैंत मनैकि गाँणि-माँणी।। कब तक जाँणीं, य बयाव बताल।। दैंखरैकि पुन्तुरी कैं आग् लगै दियो। पिरमकि गंग कैं आज बगै दियो।। अन्यार दिलों में दिवाई जगै दियो। सिति मनख्योव कैं फिर जगै दियो।। सब भौल हौल् रे! य बयाव बताल।।

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मोहन जोशी, गरुड़, बागेश्वर। 22-04-2016

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