नै पै - कुमाऊँनी कविता

नै पै - कुमाऊँनी कविता, kumaoni poem about tradition food and about their modern version, kumaoni bhasha ki kavita

नै पै !!

लेखिका: रेखा उप्रेती

धिनाई नि भई
पिनेर भयाँ
कड़ू पाणि
आब ऊ हुँ
'ब्लैक टी' कुनि।

ग्युँ पिस्यु में
जौं मडु मिले
बणूनेर भयाँ लेस्सु
आब ऊ हुँ
'मल्टी ग्रेन' कुनि।

भट्ट पिस चावल दगै
पकै दिनेर भयाँ
जौल
आब ऊ हुँ
क्याप्प 'रिसोटो' जस कुनि।

बा'ड़ में जे लै भौय
हरि-परि
मिले-मुले बेर
बड़ै दी ब्याल'क साग
आब ऊ हुँ
'मिक्स वैज' कुनि।

पाथर' क पा'ख
लाकड़ै'क छाज वा'ल
ऐपण'ल छजी खोई
ठुल्लि बाखई वाल
जहुँ कुछियाँ घर
ऊ खन्यार हुँ
आब 'हेरिटेज' कुनि।
(रेखा उप्रेती)

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