
जिम कार्बेट पार्काक् शेर......
रचनाकार: ज्ञान पंत
खाप
ताँड़ियैलि
जि हुँछ....
हा्ट - भा्ंट
टोड़ण पड़नी
तब जै बेरि
इचा्व में
पाँणि पुजों ....
कुल्यूँण
खालि जि हुँछ
पाँणि - पौर
बैठि रुँण पड़ौं ....
नेता
के जाँणों
जतका्व पेट
ल्ही बेरि
माईक में
ढोल जस बाजों
क्वे सुणों
झन सुणों ....
के फर्क पड़ौं
उकैं, मगर
ते कैं
फर्क पड़न चैंछ
लोकतंत्र में ......
यो एक
जरुरी शर्त छ।
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शब्दार्थ:
ताँड़ियैलि - खोलने से,
हा्ट भा्ँट - हड्डी पसली,
इचा्व - खेेत का किनारा,
कुल्यूँण - खेत में पानी लगाना,
पाँणि पौर - पानी की चौकीदारी ,
जतका्व पेट - फूला हुआ पेट या गर्भवती जैसा,
July 25, 2017

...... ज्ञान पंत
ज्ञान पंत जी द्वारा फ़ेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी से साभार
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