
शक्ति के रूप में पूजी जाती है मां हाटकालिका
(लेखक: वेदप्रकाश पांडे, विमल)
कुमाऊं रेजीमेंट की आराध्य देवी है मां हाटकालिका
आदि गुरू शंकाराचार्य ने शक्ति के रूप में कीलित किया
देश भर में ऐसे कई शक्तिपीठ हैं जो किसी न किसी पौराणिक व ऐतिहासिक कारणों से विख्यात हैं, लेकिन गंगोलीहाट का कालिका मंदिर ऐसा मंदिर है जहां सेना के बड़े बड़े अधिकारी अपना शीश नवाते हैं। चारों तरफ देवदार के पेड़ों से घिरे हुए इस मंदिर की घंटियों व यहां बने धर्मशालाओं में किसी न किसी सैन्य अधिकारी का नाम जरूर देखने को मिलता है। इसका मुख्य कारण यह है कि कुमाऊं रेजीमेंट कालिका माता को अपनी आराध्य देवी के रूप में पूजता है। गंगोलीहाट मंदिर में साल भर कुमाऊँ रेजीमेंट के जवानों और अफसरों की भीड़ लगी रहती है।
कुमाऊं रेजीमेंट के हाट कालिका से जुड़ाव के बारे में एक दिलचस्प पर कहानी है। यहां के पुजारी बताते हैं, द्वितीय विश्वयुद्ध 1939–1945 की बात है, तब भारतीय सेना का जहाज डूबने लगा। तब सैन्य अधिकारियों ने जवानों से अपने अपने भगवान को याद करने को कहा, कुमाऊँ के सैनिकों ने जैसे ही हाट कालिका का जयकारा लगाया वैसे ही जहाज किनारे आ गया। तभी से कुमाऊँ रेजीमेंट ने मां काली को आराध्य देवी की मान्यता दे दी, जब भी कुमाऊं रेजीमेंट के जवान युद्ध के लिए जाते हैं तो काली मां के दर्शन के बिना नहीं जाते हैं। हर साल माघ महीने में यहां पर सैनिकों की भीड़ लग जाती है।
पहले इसका नाम शैल शिखर पर्वत था, उस समय आदि गुरू शंकराचार्य बद्रीनाथ, केदारनाथ होते हुए यहां आए तो उन्हें आभास हुआ कि यहां पर कोई शक्ति है, जैसे ही शंकराचार्य ऊपर पहुंचे वहां पर अचेत हो गए, तब वहां पर मां ने कन्या के रूप में दर्शन दिया और कहा कि मुझे ज्वाला रूप से शांत रूप में ले आओ। तब उन्हें शांत किया। हाट कालिका मंदिर की स्थापना आदि गुरू शंकराचार्य ने की। कर्माचल भ्रमण पर निकले आदि गुरू शंकराचार्य महाराज ने जागेश्वर धाम पहुंचने पर गंगोली में किसी देवी का प्रकोप होने की बात सुनी।
शंकराचार्य के मन में विचार आया कि देवी इस तरह तांडव नहीं मचा सकती। यह किसी आसुरी शक्ति का काम है। लोगों को राहत दिलाने के उद्देश्य से वह गंगोलीहाट को रवाना हो गए। बताया जाता है कि जब वह मंदिर के 20 मीटर के करीब पहुंचे तो वह जड़वत हो गए। लाख चाहने के बाद भी उनके कदम आगे नहीं बढ़े। शंकराचार्य को देवी शक्ति का आभास हो गया। वह देवी से क्षमा याचना करते हुए पुरातन मंदिर तक पहुंचे। पूजा, अर्चना के बाद मंत्र शक्ति के बल पर महाकाली के रौद्र रूप को शांत कर शक्ति के रूप में कीलित कर दिया और गंगोली क्षेत्र में सुख शांति की स्थापना हो गई।

कुमाऊं रेजीमेंट ने पाकिस्तान के साथ छिड़ी 1971 की लड़ाई के बाद गंगोलीहाट के कनारागांव निवासी सूबेदार शेर सिंह के नेतृत्व में गंगोलीहाट आई सैन्य टुकड़ी ने महाकाली के मंदिर में महाकाली की मूर्ति की स्थापना की। कालिका के मंदिर में शक्ति पूजा का विधान है। सेना द्वारा स्थापित यह मूर्ति मंदिर की पहली मूर्ति थी। इसके बाद 1994 में कुमाऊं रेजीमेंट ने ही मंदिर में महाकाली की बड़ी मूर्ति चढ़ाई। 1971 की लड़ाई में भारतीय सेना ने पाकिस्तान को हराया था। 16 दिसंबर 1971 को पाकिस्तानी सेना के एक लाख जवानों ने भारतीय सेना के सामने को विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है। सेना की विजयगाथा में हाट कालिका के नाम से विख्यात गंगोलीहाट की महाकाली का भी गहरा नाता है।

0 टिप्पणियाँ