
तेरी मेरी जोड़ी
रचनाकार: राजू पाण्डेय
बुराँसो फूल जसो, हाय! छाजी रौ तेरो रूप
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
जिंदगी खट्टी मिठ्ठी, भांगा कि चटनी जसि
तू छै अलकाच्वौ भांगौ, मि निचोडियो चूक
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
तेरौ मेरौ मैल जसै, भरि चाहा की कितली
मि इलैची और चहापति, तू चीनी और दूद
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
बदलन्या मौसम जसा, छन तेरा मेरा हाल
तू गर्मी में छाया "बनुली", मि ह्यूनै की धूप
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
यौ हमारी हरि बगिया, हाम एक दूजा अधार
मि ठडी ठांगरो जसौ, तू फुली काकडे झूल
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
जिंदगी का गड़ा जौतना, हाम बल्दौ की हल
दानौ कानो मि सभालु, तू बूं काना की धूर
तेरी मेरी जोड़ी "बनुली", दुनि में सबौ है खूब।
शब्दार्थ:
अलकाच्वौ - आधा कच्चा।
भांगौ - भांग।
चूक - नीबू का रस।
ठडी ठांगरो - खड़ा खम्भा।
गड़ा जौतना - खेत जोतने।
बल्दौ - बैलों।
हल - जोड़ी।
दानौ कानो - दाहिना कंधा ।
बूं काना - बांया कंधा।
~राजू पाण्डेय, 25-06-2020

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