
"तु और मि"
रचनाकार: मोहन चन्द्र जोशी
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तु टीवी क् चैनल छै वे
मि रेडियो स्टेशन।
मि खुस्याणी क् खुन छन
वे तु पकौड़ी क् बेसण।।
मि टाल् हाली सुर्याव
तु पिछौड़ि क् चाव।
हरिया गाज्यो छै तू
मि सुकी पराव।।
तु रपकन टीट क् गड़
मि झुंङरी उपरूं सुतड़।
ब्योलि की घुंघटि छै तू
मि फाटी टालौ़ं क् भुतड़।।
लसकन हलु छै तू
मि अमल मो घलु।
मौनूं कि रॉणि छै तू
मि बानर यकलु।।
मि फुटिया ठ्यक
तु इनरैंणी क् रयख।
तुकैंजी तो दुनि द्यखैं
मिकैं कैल द्यख।।
बुरांशी गुफाइ छै तू
मि स्यौंत क् ठिट।
काफोव जसि मिठि छै तू
मि बितांण जस तित।।
त्यर नाम क् नाम
म्यर नाम क् के नाम?
म्यार कइया उपाम है जैं
त्यार कइया थिरथाम।।
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मोहन जोशी, गरुड़, बागेश्वर। 24-01-2016
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