डोर और दुबड़ा वाला त्योहार


डोर और दुबड़ा वाला त्योहार

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(लेखक: जगमोहन साह)

आज ही के दिन कुमाऊनी महिलाओं द्वारा डोर और दुबड़ा धारण किया जाता है। यह त्योहार महिलाओं से सम्बन्धित है। महिलाऐं वृत रखकर सप्तमी को भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करती है तत् पश्चात अपनी बाह पर पंडितजी द्वारा प्रतिष्टित सप्त ग्रन्थियुक्त डोर बाधती है, और अगले दिन अष्टमी को गले में दुबडा धारण करती है।

इस के पीछे क्या कहानी वह मुझे नहीं मालूम है। कुछ लोग इसे सांतू-आंठू की कहानी से जोड़ते हैं। इसकी जानकारी मुझे लाला बाजार अल्मोड़ा निवासी श्रीमती उमा साह (बुजुर्ग महिला) से मिली है। वे बता रही हैं कि इस वर्ष सप्तमी व अष्टमी एक ही दिन है अतः आज ही डोर और दुबड़ा दोनों धारण किए जारहे हैं।

इन डोर और दुबड़ा का निर्माण अल्मोड़ा शहर के ही पटूवा समुदाय के लोगों द्वारा किया जाता है, अब इसकी बनावट व डिज़ाइन में इनके द्वारा काफी बदलाव किया गया है।

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