
पहाड़ी लड़की का अपने प्रेमी को पत्र
लेखक: राजेंद्र सिंह भंडारी
यार तुमर बसक लै के नछु... चार साल हगीं जब तुमूल कौ कि मि तुमुकु भौल लाग्नु, लेकिन यौ चार सालों मि तुमूल के सपाड़ौ? चार बार आर्मी'क भर्ती मि जै आछा पर एक बार लै भर्ती नि हाया। कभतै मेडिकल मि भ्यार हैं जांछा, कभतै तुमर छाती नाप कम ह जैं। आब तो मिकैं शक जस हुणौ, पत्त ना दौड़ लै पुर करछा या बिना पुर करियै झौल टांक बे ऐ जांछा ?
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यां म्येरि इज हर चौथ दिन इथां-उथां बै क्वे न क्वे कुनव ल्य ऐं.. पिछाड़ि साल तक तो मि जसी-तसी ब्या करनैं लिजी मना कर दिछि लेकिन यौ साल एम.ए लै पुर हजां... आब तुमर क्वे भल जै नोकरी नि लाग्नि तो मिकैं भुल जाओ तुम... चार साल पैली अगर चार बकार लै बांधी हुना तो आज तक चालीस है जांन, लेकिन तुम तो इथा-उथां डोई रुने भया.. म्यर के धन ज के भाय, खाल्ली आपूण दगड़ियों दगा क्रिकेटै खेलण मि मगन हैं रुंछा....
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आब के लिखूं? लिखूंहूं मन तो भौत छू लेकिन तुमसे के मतलब? तुम के समंझछा थोड़ी.. तुमर तरबै क्याप भौय... देखो साफ-साफ कुनु। या तो यौ बार भर्ती है जाओ, और अगर भर्ती नि है सकना तो भाभर जबे कत्ती मुनौव च्यापो। कस्से लै नोकरी पकड़ लियो और उमीजी मन लगाओ..
बाकी सब ठीक छू, मि बस यौ साल तक आपूण ब्या टाल संकनु....
तुमर जबाबक इंतजार रौल।

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