
पहाड़ौ जीवन पहाड़ै जस्
रचनाकार: हीरा बल्लभ पाठक
पहाड़ौ जीवन पहाड़ै जस्
एक ढुंग रड़ौ त् खनरपट्ट
कतू मेहनत लागीं यौ वी ज्याणों
जैल् मुनव कुच्यै रौ पहाड़ पनां।
हम भाबरि त् सुबिधाभोगी भाय
हम क्ये ज्याणनूं पहाड़ै पीड़
धरति अगास एक करंण पडूं
एक जीवन बचूणां खातिर
ड्यांसि ढुंगम् कन्ये बोट
पैद् करंण पडूं तब ल्यख लागूं
पहाड़ौ जीवन दाज्यु !
तब ल्यख लागूं पहाड़ौ जीवन।।
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हीरावल्लभ पाठक (निर्मल), 19-12-2020
स्वर साधना संगीत विद्यालय लखनपुर,रामनगर
हीरा बल्लभ पाठक जी द्वारा फेसबुक ग्रुप कुमाऊँनी पर पोस्ट
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