
"अमर शहीद भगत सिंह"
कुमाऊँनी कविता
रचनाकार: मोहन चन्द्र जोशी
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23 मार्च को अमर शहीद भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव
के चरणों में हृदय से श्रद्धांजलि एवं कोटि-कोटि नमन्। 🌺 छंद- तेईस मार्च उन्नीस सौ इकतीस फांसी की तारीख छि।
भगत सिंह राजगुरू सुखदेव कैं य देश कि कसि टीस छि।। यैका विरूद्ध सारै देश में प्रदर्शन हणींना शहर गौं। बस एकी आवाज में नार् इनरि सजा कैं बदवौंहौं।। 🌺 चौपाई-जब मृत्युदण्ड मिलण है पैली। इनार् मै-बाब मिलण हुँ औंनी।। सबै कुटम्बी अौर सम्बन्धी। मिलि सब फिर मिलि मयडी।। उ दिलेर इज तब कैंछ च्चल हैं। च्यला हठ तु आब् छोड़िये नै।। एक दिन तो सब्बुंल् मरणैं-मरण। मरण वी छु जो दुनिं याद करण।। आपुं आंखां में भरि ल्यैं पाणीं। मि चानूं च्यला य हिय कि वाणी।। फांसी तखत जब ठाड़ हओ। इन्कलाब जिन्दाबाद नार् कओ। उ सांच च्यल मै का वचन निभौं । उ भगत सिंह सांच देशभक्त हौं।।

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मोहन जोशी, गरुड़, बागेश्वर। 23-03-2016
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