न काथडी बच न आतड़ी - कुमाऊँनी कविता

न काथडी बच न आतड़ी - कुमाऊँनी कविता, poem in kumaoni language about danger of alcoholism, kumaoni kavita

न काथडी बच न आतड़ी

रचनाकार: राजू पाण्डेय


रमदा बादलौ झा हैग्यान
जान वख्त कैं ना देखिना
जब लै उनौन
कैसे दयौ न्यौति खूब 
घड़घड़ाट भड़भड़ाट 
कैसे फाट्या बादल जसा
उखालनौ तड़तड़ात
बादल त, 
जति पयौ जति उखालो
उनु थै त ठूलो सागर छ
तुमरी त उलै गिरबी छ हो
चार नाली जमीन जौ भावर छ
बादल त फुटनया गुब्बारा झा 
न उनरि किडनी ना आतड़ी
तुमरी त छन दा, अत्ति न पी 
पी बैर न घरबार बच
न काथडी बच न आतड़ी।।

~राजू पाण्डेय, 20-07-2020
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