कैसे तुम आलै के - कुमाऊँनी कविता

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कैसे तुम आलै के

रचनाकार: राजू पाण्डेय

कतुक साल पैले
छोड़ी गौछया
मेरा भरोष मे
भाड़ में खाली कोरंगा
ना बाली सक्या लाकडा
ग्यु पिसनया चक्की पाटा
द्यु तीन लुवा बक्सा
जीनु मे टांजि गहा
थाली भांडा
माटा घैर भीतर बनाया
द्यु बिन लिप्या
चुलान, भ्या माटा
लागि रहूं जी जाने लै
तेरा भरोषा मे
खरो उतरनो मे
जंग खै झड़या
सांगलो और चावी ले
ढुङ्गाले लै छोड़ी हा
साइड साइड बठे जागा
कई बैर कोशिश करि है
आंधी भुय्या लै
धक्कै बैर भीतर जाना की
फिरि लै जसै तसै ठड़ी रहूं
कैसे तुम आलै के
मि तुमरौ मौलो दवार।। 

~राजू पाण्डेय, 12-07-2020
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