
-:बड़बाज्यु और आमैकि फसक:-
लेखिका: अरुण प्रभा पंत
रत्तै रत्तै खटपट शुणि तो मकं आपण मिठ्ठि नीन में यो खटक भौत्तै खटक गे पर के करछ्यु के ढंगैलि फिर पडी़ गेयूं।
झिट्ट घडि़ मकं नीन ऐन्हैलि कि फिर खड़बड़ खड़बड़, "हे भगबान तौं बुढ़-बाढि़न कं कसिकै चैन न्हां शंचैल रूणै नि दिन।"
के करछी पै थ्वाड़ देर में उठी गेयुं।
जैसे आमैल मकं देखौ - "चेला नीन ऐछौ भलीकै?"
पर मनैमन कौ - "ऊंण देला तो आलि नै।"
पर मुखतिरकै दे - "हैय अमा भली कै ऐ।"
"नै ध्वे आ पै फिर चहा पेलै।"
"मैतो पैल्ली चहा प्यूंल अमा।"
पुर एक गिलास आमौक बणयी गडमड चहा पिबेर तब भितेर ऐयुं और पुर एक घंट माथ नाण हुं जै सक्युं।
यो बीच आम बड़बाज्यूक बीच जो बात शुणी -
आम् - तुम हर बखत तो भुबनाक मुखतिर नि भैटी करौ,रोज ऐजां ,कामकन न काजौक। हमन दगै हमन जै दुसार दगै दुसरैकि जै, बस मुफ्तोक चहा, मुफ्तौक खाण, इथकै दोईण उथकै दैईण और के नै।"
बड़बाज्यु - "म्यार के जाणौ, भय तो आपणें स्वार बिरादर। वीक चहा पिण में के घटणौ हमौर, म्योर लै टैम पास है जां और पुर गौंपन के हुणौ सब पत्त चल जा,पुर गौक खबर धर दीं मुख सामिण।"
आम् - "पत्त नै तौ भुबन कं देख मकं रीश लागें एक नंबरौक जालि
मैस छु तौ, मलि मल्लिऐक मलाय खाणी और तर माल उडू़णी छु तौ नानछिना बै।"
बड़बाज्यू - "तुलै के लागरैछै तौ भुबनाक पछिन आब जेके बदयीं तौ तैक बाब, बड़बाजि सबै तसै भाय, तौलै उनन में जैरौ, केकरनू हम। एजां तो आ बैठ कूंणै पणनेर भौय।"
आम् - "तस तौ भयै, तबै चहा लै बणुनेर भयुं मैं।
बड़बाज्यु - "तुलै जब तौ भूबन ऊं तो घतघत जौ चहा बणै ल्यूंछै तबै नै!"
आम् - "पै और के करू 'खुर्यौक जौ गु' तौ रोजौकै रोग भौय। क्वे दिन निआल कूण जौ निभौय, द्यो तहौड़, घाम, ह्युं पडि़ हौ हर दिन उनेरै भौय।"
बड़बाज्यू - "पिछिल जन्मौक भोग भाग हमलै पुर करणैयां तेक कर्ज चुकूण हुनौल चुकूणयां, बल्कि रोज तकं खाण खवै दी कर बुढि़या।"
आम् - "घुत्ती खऊंल रोज उसी लै त्यार ब्याराक दिन तो खानै छु हमार यां कभै कभै कास नियार लगूं और फिर खऊणै पणूं।"
बड़बाज्यू - "तु बुढि़ लै कम चलाक न्हांतै, मैं सब समझूं।"
मौलिक
अरुण प्रभा पंत, 14-01-2021
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