हामरी लै खबर ली

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हामरी लै खबर ली

रचनाकार: राजू पाण्डेय

दस-बार पढ्यौ कसिकै
छिलका उज्याला मे
दयू रोटो जुगाड़ ना छयो
मेरा पहाड़ म्याला मे।

दयू-चार हल जमीन
हुनौंन आठ-दस नाली ग्युं
उहै बाकी खर्च लीजाणौ
हलिया, बलद और ब्युं।

अस्पतालों में डॉक्टर ना
ना स्कूलों मे मास्साब
नंतिना भली पढ़ूना सोची
टूटन लाग्या ख्वाब।

दयू रोटा, भविष्य खातिर
गौं छोड़ि शहर टोप दी
मेहनत हामुळे खूब करि
जैले जसिलै जोब दी।

लागि रौछय जसि कसि कै
कौई बेटर कौई सैफ
कवै भै-बंधू भांडा धवै नौछया
काम करन मै कसी झैंप।

ये कोरोना खोरी फूटी ज
भयो सब कुछ मंद
द्यु रोटो जुगाड़ छूट्यौ
दाज्यू होटल भया बंद।

ब्याली तकै कमुन्या चेला
है गयां घर वाला मे भार
थोड़ी हामरी लै खबर ली
जागि जा हो सरकार। 

~राजू पाण्डेय, 13-07-2020
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